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लॉकडाउन में भूखे हुए अयोध्या के बंदर, कई लोगों को काटा

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अयोध्या. राजा श्रीराम की नगरी अयोध्या में बंदर इन दिनों भूख से बेहाल और काफी गुस्से में हैं. देश भर में लगे लॉकडाउन के कारण पवित्र शहर में पर्यटकों की आवाजाही बंद हो गई है, जिसके कारण बंदरों को खिलाने के लिए कोई नहीं है. पिछले 24 घंटों में, बंदरों ने 39 लोगों पर हमला किया और काट लिया.

श्री राम अस्पताल के डॉक्टर अनिल कुमार ने कहा कि 39 लोग बंदरों के काटने के बाद अस्पताल आए हैं. उन्होंने कहा, यह सबसे अधिक संख्या है जिसे इस मामले में मैंने कुछ घंटों में देखा है. अयोध्या के निवासी रामलाल मिश्रा के अनुसार, अयोध्या में करीब 7,000 से 8,000 बंदर हैं.

उन्होंने कहा, आम दिनों में चूंकि हजारों पर्यटक अयोध्या आते हैं और वे बंदरों को केले, ब्रेड, पूरियां और अन्य चीजें खिलाते हैं. अयोध्या के बंदर कभी वृंदावन के बंदरों की तरह आक्रामक नहीं हुए थे, लेकिन वे अपना भोजन गुजर रहे लोगों के बैग और धूप के चश्मे छीनकर लेना सुनिश्चित करते हैं, वे भोजन देने पर ही इन चीजों को लौटाते हैं.

उन्होंने आगे कहा, हालांकि, लॉकडाउन के बाद, पर्यटकों की आमद बंद हो गई है. यहां तक कि स्थानीय लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं क्योंकि सभी मंदिर बंद हैं. भूख के कारण बंदर आक्रामक हो रहे हैं. बंदर द्वारा काटे गए पीडि़तों में से एक, राजू ने कहा, मैं अपनी छत पर सूखने के लिए कपड़े डाल रहा था, तभी बंदरों का एक झुंड आया और इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता वे मुझ पर झपट पड़े और उनमें से एक ने मुझे कंधे पर काट लिया. मैंने पहले कभी भी बंदरों को इस तरह का व्यवहार करते नहीं देखा. स्थानीय लोगों ने भी बंदरों को भोजन देना बंद कर दिया है, क्योंकि वे भी लॉकडाउन के बीच हो रही परेशानी का सामना कर रहे हैं.

अपने दो बेटों और उनके परिवार के साथ रह रहीं बुजुर्ग रमा गुप्ता ने कहा, मैं बंदरों के लिए अपनी छत पर चना और रोटी रखती थी, लेकिन अब लॉकडाउन को लेकर अनिश्चितता के साथ, मैं अपने परिवार के लिए सभी खाद्यान्न रख रही हूं. इसके अलावा, मेरे बेटे की स्टेशनरी की दुकान है जो 22 मार्च से बंद है, इसलिए आमदनी भी रुक गई है. ऐसी स्थिति में, अधिकांश लोग बंदरों को खिलाने में असमर्थ हैं. स्थानीय प्रशासन का दावा है कि यह बंदरों के लिए रोटी और चना उपलब्ध करा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अपर्याप्त है. सभी रेस्तरां और भोजनालयों के पूरी तरह से बंद होने के कारण, बंदरों को बचा-खुचा भोजन भी नहीं मिल पा रहा है.

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