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जीतन राम मांझी का बड़ा आरोप, बोले- केंद्रीय मंत्री सहित 5 सांसद फर्जी प्रमाणपत्र से पहुंचे लोकसभा

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पटना. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के सहयोगी जीतन राम मांझी ने बुधवार को आरोप लगाया कि एक केंद्रीय मंत्री सहित पांच सांसदों को फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों से लोकसभा के लिए चुना गया है. उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की है.

दिल्ली में अपनी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मांझी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार कश्मीर में शांति स्थापित करने के प्रयास कर रही है, लेकिन परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं.

देश में महाकाव्य रामायण के लेखक महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धांजलि देने के साथ, दलित नेता अपनी विवादास्पद टिप्पणी पर अड़े रहे कि भगवान राम एक काल्पनिक चरित्र थे और कहा कि संत वाल्मीकि राम से हजारों गुना बड़े थे. उन्होंने कहा कि यह मेरा निजी विचार है और मैं किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता.

इन पांच सांसदों का लिया नाम

मांझी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल, जय सिद्धेश्वर शिवाचार्य महास्वामी (भाजपा), कांग्रेस सांसद मोहम्मद सादिक, टीएमसी सांसद अपरूपा पोद्दार और निर्दलीय सांसद नवनीत रवि राणा चुनाव लडऩे के बाद एससी के लिए आरक्षित सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं. मांझी ने इस मामले की जांच की मांग की है. मांझी ने दावा किया कि अनुसूचित जाति के लोगों को नौकरियों और यहां तक कि स्थानीय निकाय चुनावों में भी 15 से 20 प्रतिशत कोटा लाभ जाली जाति प्रमाण पत्र के आधार पर दूसरों द्वारा हड़प लिया जाता है. ऐसे मामले रुकने चाहिए.

एचएएम के सभी संगठनात्मक निकाय भंग

एचएएम अध्यक्ष ने पार्टी के सभी संगठनात्मक निकायों को भंग करने की घोषणा की और कहा कि उनका जल्द ही पुनर्गठन किया जाएगा. उन्होंने सभी के लिए एक समान स्कूली शिक्षा प्रणाली और अनुसूचित जाति के लिए एक अलग मतदाता सूची की भी मांग की. उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के बच्चों के लिए सामान्य स्कूली शिक्षा समानता लाएगी. यदि ऐसी शिक्षा की समीक्षा 10 वर्षों में सकारात्मक परिणाम लाती है तो फिर आरक्षण की आवश्यकता नहीं होगी.

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