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इंसाफ न मिलने से बौखलाई, फिर एक महिला इस हद तक आई

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लखनऊ। उन्नाव रेप केस का मामला अभी लोगों के दिलो दिमाग से पूरी तरह से साफ भी नही हो सका था कि एक बार फिर एक रसूखदार प्रधानाचार्य की छेड़खानी से परेशान उपप्रधानाचार्या पद पर तैनात महिला द्वारा कोई सुनवाई न होने के चलते विधानसभा के सामने आत्मदाह का प्रयास किया गया। इस घटना से जहां न सिर्फ सरकार एक बार फिर कटघरे में खड़ी नजर आती है बल्कि फिर पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान लग रहे हैं। जबकि हाल की उन्नाव वाली घटना में वैसे ही पुलिस के इसी लचर रवैये के चलते सरकार और खुद पुलिस विभाग की काफी किरकिरी हुई है।

गौरतलब है कि योगी सरकार की पुलिस पर एक बार फिर सवालों को घेरे में है। इस बार मामला जहां ठीक सरकार की नाक के नीचे अर्थात राजधानी लखनऊ का है साथ ही इस बार छेड़खानी का आरोपी जिस संगठन से जुड़ा बताया जाता है वो बेहद गंभीर बात है। वहीं जैसा कि बताया जाता है कि आरोपी के रसूख के चलते फिर वो ही उन्नाव वाली गलती का पुलिस द्वारा दोहराया जाना प्रदेश की सरकार के लिए एक और खतरे के संकेत देने वाला है।

जैसा कि पीड़िता का आरोप है कि छेड़छाड़ के आरोपी को बचाने के लिए पूरा पुलिस अमला ही पीड़िता के विरोध में उतर आया। छेड़छाड़ के आरोपी और प्रताड़ित करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीएम योगी से शिकायत के बाद जब कोई नतीजा नहीं निकला तो पीड़िता ने विधानसभा के सामने आत्मदाह करने का प्रयास किया, लेकिन समय रहते ही मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया।

जानकारी के मुताबिक, लखनऊ की रहने वाली वाइस प्रिंसिपल रश्मि विश्वकर्मा ने कैसरबाग स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के प्रिंसिपल विनोद अवस्थी पर 9 जुलाई, 2016 में छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज कर कराया था। आरोपी प्रिंसिपल आरएसएस से जुड़ा हुआ है। इस बात की शिकायत पीड़िता ने पुलिस के बड़े अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री योगी के दरबार में भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके चलते विधानसभा के सामने मंगलवार को पीड़िता ने आत्मदाह का प्रयास किया।

पीड़िता का आरोप है कि पुलिस भी विनोद अवस्थी के साथ मिली हुई है। उसने मुझपर मारने-पीटने का फर्जी केस किया है। मेरे पास उसके खिलाफ सारे सबूत हैं। हमारा केस भी चल रहा है। खुद कालिका प्रसाद ने मेरा मेडिकल करवाया है। उसके बाद मैं सीओ से भी मिलने गई। उन्होंने एफआईआर लगा दी। सीओ का कहना है कि कोई संलिप्तता नहीं मिली है। मैंने पुलिस को गवाही और गवाह दोनों दिए, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मुझे समझौते की धमकी भी दी। मुझ पर जबरदस्ती समझौता करवाने का दबाव भी बनाया गया।

 

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