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इस तरह से भीड़ के बाहर आने का किस्सा, कहीं है तो नही किसी बड़ी साजिश का हिस्सा ?

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रवि प्रकाश श्रीवास्तव (ब्यूरो प्रमुख)

डेस्क। एक तरफ गरीबी का साया उस पर पेट की वो आग जिस पर शायद ही किसी का जोर चल पाया। उस पर ये सितम कि परदेश में जब होकर रह गये लंबे समय तक कैद तो ऐसे में हर किसी को बड़ी ही शिद्दत से है अपना गांव और घर याद आया। बस ये ही वो अहम मजबूरियां हैं जिसका न सिर्फ फायदा उठाया जा रहा है बल्कि इसके बल पर ही इन मजबूरों को जब-तब किसी न किसी तरह से उकसाया और बरगलाया जा रहा है।

शायद इसकी ही बलिहारी है जिसका फायदा उठाने में तमाम देश के गदृदार और धूर्त लोग लगातार लगे हुये हैं। इनकी साजिशों को समय रहते ही नेस्तनाबूद करना होगा क्योंकि इनकी इन साजिशों के चलते जहां एक तरफ ऐसे नाजुक हालातों में कभी भी हालात काबू से बाहर हो सकते हैं। और पल में ही हमारे देश की हालत को भी तमाम बाहरी देशों से भी बद्तर कर सकते हैं।

गौरतलब है कि इन साजिशों को अंजाम देने वाले दरअसल ये वो लोग हैं जो चाहते हैं कि कैसे भी देश सामूहिक संक्रमण की चपेट में आये। और वो देश की सरकार को इसकी आड़ में बदनाम कर पायें। हालांकि ऐसे देशद्रोही तत्वों की इन कोशिशों को बल तमाम राज्य सरकारों के उन लचीले रवैये से भी मिल रहा है जो लॉकडाउन का इतना लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी अब तक अपने राज्यों में फंसे अप्रवासी गरीब मजदूरों और मजबूरों के लिये वाजिब मूलभूत व्यवस्थायें नही कर पाये हैं। बल्कि बस जैसे तैसे खानापूर्ति और प्रोपोगंडा करने में जुटी हैं।

देश की मोदी सरकार और राज्यों की सरकारों को कहीं न कहीं इस पर गंभीरता से विचार किया जाना बेहद जरूरी है। क्योंकि अभी भी देश कोरोना जैसे ज्वालामुखी के मुहाने पर ही बैठा है बल्कि इस वक्त और भी अधिक सावधानी की जरूरत है। लेकिन ऐसे हालातों में जिस तरह से भीड़ द्वारा अचानक लॉकडाउन के बावजूद भी एक के बाद एक राज्य में बाहर निकल कर आने की घटनायें सामने आ रही हैं। वो देश को किसी बड़े खतरे और कोरोना के सामूहिक संक्रमण की ओर बढ़ाने वाली हैं।

वहीं अगर कुछ जानकारों की मानें तो उनके अनुसार ये एक बहुत ही सोची समझी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है दरअसल देश विरोधी तत्व एक तीर से तीन निशाने साधने में लगे हैं। उनके अनुसार इस भीड़ को बरगला कर जहां वो देश को सामूहिक संक्रमण की चपेट में लाने में सफल हो सकते हैं। वहीं काफी समय से जारी जमातियों वाले मामले से ध्यान बंटाने में कामयाब हो सकते हैं। इसके साथ ही देश की मोदी सरकार के अब तक किये गये सारे प्रयासों पर पानी फेर सकते हैं।

इसलिये जानकारों के अनुसार इसको हल्के में लेने की भूल कतई न की जाये। क्योंकि मौजूदा वक्त में अभी देश से कोरोना द्वारा फैली महामारी का संकट टला नही है बल्कि कुछ जगहो से संक्रमण के मामलों में बढोत्तरी अब पहले से ज्यादा नजर आ रही है। जिसको देखते और अचानक राज्यों में इस तरह से भीड़ का अचानक एक जगह पर जुटना कोरोना की महामारी की आग में घी का काम करने वाली ही साबित होगी।

केन्द्र की मोदी सरकार समेत राज्यों की सरकारों को इन मामलों की गंभीरता को समझ जल्द से जल्द ऐसे कदम उठाने होंगे ताकि इसकी पुनरावृत्ति न हो सके। और देश विरोधी तत्व कतई भी अपनी साजिश में कामयाब न हो सकें। ज्ञात हो कि देश के कुछ राज्यों से अचानक भीड़ द्वारा बाहर निकल एक जगह जुटने की घटनाये सामने आ रही हैं।

जिसके तहत बुधवार को अचानक मुंबई के बांद्रा और ठाणे के मुंब्रा में मजदूरों, कामगारों की भीड़ ने लॉकडाउन की व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले दिल्ली में मार्च महीने के आखिरी सप्ताह में ऐसा हुआ था। तीन दिन पहले सूरत में भी दूसरे राज्यों के मजदूर सड़क पर उतर आए थे। जिस पर लगाम लगाया जाना बेहद जरूरी है।

इतना ही नही बल्कि मुंबई के बाद अब दिल्ली में लॉकडाउन  की धज्जियां उड़ती दिख रही हैं । कश्मीरी गेट के पास यमुना नदी के किनारे हजारों की संख्या में मजदूर पहुंच गए हैं। हालांकि इन प्रवासी मजदूरों के जुटने के कारणों का पता नहीं लग पाया है । फिलहाल इन सभी को फल देकर शेल्‍टर होम्‍स में शिफ्ट कर दिया गया है, जो कि दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में बनाए गए हैं।

मजदूरों के जुटने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया है । उन्होंने कहा कि यमुना घाट पर मजदूर इकट्ठा हुए. उनके लिए रहने और खाने की व्यवस्था कर दी गई है । उन्हें तुरंत शिफ्ट करने के आदेश दे दिए हैं। रहने और खाने की कोई कमी नहीं है. किसी को कोई भूखा या बेघर मिले तो हमें जरूर बताएं ।

ज्ञात हो कि हाल ही में अहमदाबाद में भी यही हुआ। आखिर इस तरह के हालात के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या इसके पीछे कुछ लोगों की साजिश है या फिर सरकार के तंत्र से भी कोई बड़ी चूक हुई है? फिलहाल मुंबई पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है, लेकिन मजदूरों के बांद्रा में जमावड़े को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

वहीं गुजरात के सूरत शहर में लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी प्रवासी मजदूर लॉकडाउन का उल्लंघन कर बाहर सड़कों पर निकल आए। पुलिस ने बताया कि खाने की शिकायत को लेकर ये लोग बाहर निकले। एसीपी डीजे चावडा ने बताया कि करीब 300 प्रवासी मजदूर बुधवार शाम करीब चार बजे पंडोल के वेद रोड पर इकट्ठा हो गए। इनकी शिकायत बहुत ही छोटी सी थी कि उनके लिए जो खाने की व्यवस्था की गई है, वह सही नहीं है।

बताया जाता है कि दरअसल देश में लॉकडाउन की वजह से यूपी, बिहार और ओडिशा से आए हजारों मजदूर यहां फंसे हुए हैं। ये मजदूर यहां की फैक्टरियों में काम करते हैं। कई एनजीओ की मदद से प्रशासन ने इनके लिए खाने की व्यवस्था की हुई है। इससे पहले मंगलवार को भी सूरत के वारछा क्षेत्र में बहुत से प्रवासी मजदूर बाहर निकल आए थे। उनकी मांग थी कि उन्हें उनके गृह राज्य जाने दिया जाए।

सूरत में मंगलवार की शाम दूसरे राज्यों से यहां आए सैकड़ों मजदूर एकत्र हो गए। ये मजदूर उन्हें उनके घर भेजने की मांग कर रहे थे। ये मजदूर शहर के वारछा इलाके में सड़क पर बैठ गए और मांग करने लगे कि उन्हें उनके घर जाने की अनुमति मिलनी चाहिए। इससे पहले महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बांद्रा स्टेशन पर हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूरों की भीड़ घर जाने के लिए इकट्ठा हो गई थी। यहां वे अपने-अपने घर जाने देने की मांग कर रहे थे।

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