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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- CBI जांच के लिए राज्यों की सहमति लेना जरूरी

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी राज्य में जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI को अनुमति लेनी होगी. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 8 राज्यों द्वारा आम सहमति खत्म किए जाने के बाद यह फैसला लिया गया. अदालत ने एक फैसले में कहा कि यह नियम देश की संघीय व्यवस्था के मुताबिक है. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनिमय के अंतर्गत प्रदान की गई शक्तियों और अधिकार क्षेत्र के लिए किसी भी मामले में जांच से पहले संबंधित राज्य सरकार से अनुमति लेना जरूरी है.

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि DSPE एक्ट की धारा 5 केंद्र सरकार को संघ शासित प्रदेशों के अलावा सीबीआई की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र में विस्तार का अधिकार देती है लेकिन जब तक DSPE की ही धारा 6 के अंतर्गत राज्य इसके लिए आम सहमति नहीं देगी तब तक यह नहीं माना जाएगा. राज्य के दो अधिकारियों को भी मामले में शामिल पाया गया. अधिकारियों ने तर्क दिया था कि राज्य सरकार द्वारा दी गई सामान्य सहमति पर्याप्त नहीं थी और यदि उनकी जांच की जानी थी तो अलग अनुमति की जरूरत थी.

कोर्ट ने किस मामले में दिया फैसला?- सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला उत्तर प्रदेश के फर्टिको मार्केटिंग एंड इंस्वेस्टमेंट लिमिटेड बनाम सीबीआई के मामले में सुनाया. आठ राज्यों – राजस्थान, बंगाल, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब और मिजोरम द्वारा सीबीआई से आम सहमति वापस लेने के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

फर्टिको मार्केटिंग एंड इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक मामले में अगस्त 2019 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित एक फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर शीर्ष अदालत ने बुधवार को फैसला दिया. फर्टिको के कारखाने परिसर में सीबीआई द्वारा किए गए छापे में पाया गया कि उसने कोल इंडिया लिमिटेड के साथ ईंधन आपूर्ति समझौते के तहत जो कोयला खरीदा था, वह कथित तौर पर काले बाजार में बेचा गया था. जिसके बाद सीबीआई ने मामला दर्ज किया था.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सहमति प्रदान की थी, जिन्हें बाद में एक आरोप-पत्र में नामित किया गया था और यह पर्याप्त था. हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि करते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने ‘ परिणास्वरूप हमें राज्य सरकार की पूर्व सहमति प्राप्त नहीं करने के संबंध में उच्च न्यायालय की खोज में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिलता है.’

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