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CM केजरीवाल के टारगेट पर राहुल गांधी, बोले-कांग्रेस को वोट न दें

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नई दिल्ली! 5  राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस अकेली पड़ती नजर आ रही है. मोदी सरकार के मुकाबले के लिए महागठबंधन के गठन पर जोर देने वाली कांग्रेस के सबसे अहम साथी बसपा और सपा जहां पहले ही पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं, तो वहीं अब दिल्ली की कुर्सी पर विराजित आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस को सीधे तौर पर दरकिनार कर दिया है. केजरीवाल ने शनिवार को नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के रोहिणी इलाके में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग नरेंद्र मोदी को हराना चाहते हैं, वो कांग्रेस को वोट न दें. इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर जो भी बैठ जाए, लेकिन दिल्ली विधानसभा पर आम आदमी पार्टी को ही विजयी बनाना और सांसद भी हमारी पार्टी के ही चुनना.

केजरीवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ”दिल्ली में बहुत लोग कहते हैं, पिछली बार गलती कर दी, अब आम आदमी पार्टी को वोट देंगे. लोग कहते हैं कि राहुल गांधी को वोट नहीं देना चाहते. दिल्ली में आम आदमी पार्टी ही विकल्प है.” केजरीवाल ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग मोदी को हराना चाहते हैं वो कांग्रेस को वोट न दें और जो बीजेपी को हराना चाहते हैं वो आम आदमी पार्टी को वोट दें.

केजरीवाल ने कहा, “अगर दिल्ली में 7 सांसद आम आदमी पार्टी के होते तो दिल्ली में 10 गुना स्पीड से काम होता. हम संसद ठप्प कर देते लेकिन मेट्रो का किराया बढ़ने नहीं देते. हमारे सांसद होते तो दिल्ली में सीलिंग नहीं होती.” उन्‍होंने आगे कहा कि आज से 4 साल पहले 2014 में जनता ने दिल्ली से 7 सांसद बीजेपी के चुने थे फिर एक साल बाद जनता ने 2015 में 67 सीट देकर आम आदमी पार्टी की सरकार बनाई. अब जनता बताए कि किसने ज्यादा काम किया, आम आदमी पार्टी ने या बीजेपी वालों ने?

ध्यान रहे कि शनिवार को ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी कांग्रेस से नाता तोड़ दिया है. अखिलेश ने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए उन्होंने काफी इंतजार किया, लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई जवाब नहीं आया. इसके बाद वह अब मायावती से बात करेंगे. इससे पहले मायावती भी मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस के साथ चुनाव में नहीं जाने की बात कह चुकी हैं. बता दें कि दिल्ली की लोकसभा सीटों पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर बात नहीं बन सकी थी.

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