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शरद पूर्णिमा: अमृत की बरसात को करें आत्मसात, जानें इससे जुड़ीं तमाम महत्वपूर्ण बात

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डेस्क। कल बुधवार को शरद पूर्णिमा है। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि दिवाली की काली अमावस के ठीक 15 दिनों पहले इस दिन चंद्रमा अपने पूरे शबाब पर होता है और अपनी किरणों से धरती पर अमृत बरसाता है। चंद्रमा से बरसने वाले अमृत का सेवन किया जाए तो शरीर निरोगी रहता है। इसी मान्यता के चलते श्रद्धालु खीर बनाकर उसे छत पर रखते हैं ताकि चंद्रमा से बरसने वाला अमृत खीर में समाहित हो जाए। इस खीर का भगवान को भोग लगाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

तमाम जानकार पंडितों अनुसार हिन्दू पंचांग के आश्विन (क्वांर) मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा मनाने का विधान है। इस बार 24 अक्टूबर बुधवार को पूर्णिमा तिथि पड़ रही है। शास्त्रीय मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। इस अमृत का सेवन करने से शरीर स्वस्थ रहता है। हिन्दू पंचांग के मध्यकाल में शरद पूर्णिमा का संयोग आता है। ऐसा माना जाता है कि पूरे साल में शरद पूर्णिमा की रात ही ऐसी रात होती है जब चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है।

इसके साथ ही अश्विनी नक्षत्र से प्रभावित होता है। अश्विनी नक्षत्र के स्वामी देवताओं के वैद्य अश्विनी कुमार हैं जिन्होंने च्यवनऋ षि को दीर्घायु प्रदान किया था। आयुर्वेद ग्रंथों में वर्णित है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में औषधीय जड़ी-बूटियों के आरोग्यदायी तत्वों में वृद्धि होती है। यह भी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी धरती भ्रमण करने निकलती हैं। इस रात जागरण करके जो लोग पूजा-अर्चना करते हैं उन पर माता लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। इसे कोजागिरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

जबकि वहीं श्रीमद्भागवत महापुराण के 10वें स्कंध में उल्लेखित है कि शरद पूर्णिमा की रात श्रीकृष्ण ने गोपियों संग महारास लीला रचाई थी। जब गोपियों के मन में घमंड आ गया कि जगत पालक स्वयं उनके साथ नृत्य कर रहे हैं तो उनका घमंड तोड़ने श्रीकृष्ण अंतर्ध्यान हो गए। श्रीकृष्ण द्वारा रासलीला रचाने के कारण शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। माता लक्ष्मी को सुंदर वस्त्रों से सुशोभित कर आसन पर विराजित करें। गंध, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल से पूजा करें। घी का अखंड दीप रातभर जलाएं। श्रीसूक्त का पाठ करके कमल गट्टे के माला से लक्ष्मी मंत्र का जाप करने से आर्थिक परेशानी दूर होती है।

इसके अलावा ऐसे पावन अवसर पर सदरबाजार स्थित गोपाल मंदिर, समता कॉलोनी स्थित राधा-कृष्ण मंदिर, खाटू श्याम मंदिर, इस्कॉन मंदिर समेत अनेक राधा-कृष्ण मंदिरों में सफेद पुष्पों से श्रृंगार कर खीर का भोग लगाया जाएगा। इनके अलावा पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर में रात्रि 11 बजे पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिर में प्रतिष्ठित सभी विग्रहों का श्रृंगार कर आरती की जाएगी। खीर का भोग लगाकर खुले आसमान में रखने के बाद प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।

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