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‘पीरियड: द एंड ऑफ सेंटेंस- UP की लड़की की कहानी पर बनी फिल्म ने जीता ऑस्कर

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नई दिल्ली। देश ही नही बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए बेहद ही गर्व और खुशी की बात है कि जनपद हापुड़ की लड़की की कहानी पर बनी शार्ट फिल्म को ऑस्कर जैसे बेहद अहम पुरूस्कार से नवाजा गया। दरअसल ये फिल्म ग्रामीण क्षेत्र में माहवारी के समय महिलाओं को होने वाली समस्या और पैड की अनुपलब्धता को लेकर बनी है।

गौरतलब है कि भारत के ग्रामीण क्षेत्र में माहवारी के समय महिलाओं को होने वाली समस्या और पैड की अनुपलब्धता को लेकर बनी एक शॉर्ट फिल्म ‘पीरियड: द एंड ऑफ सेंटेंस’ को ‘डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कार मिला है।

इस फिल्म ने जता दिया कि गांव-देहात की लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। बिल्कुल हापुड़ केकाठीखेड़ा की स्नेहा की तरह । इस शर्मीली लड़की ने अपने संकल्प और मेहनत से न केवल सीनेटरी पैड बनाने वाली कंपनी में खुद काम करना शुरू किया बल्कि अपनी सहेलियों को भी इससे जोड़ा।

अब उस पर बनी एक डोकुमेंट्री ऑस्कर ने नामित हुई है। जब उसे इसका पता चला तो खुशी से उसके मुंह से एक शब्द भी नहीं बोल पा रही है। काठीखेड़ा में मध्यम वर्गीय परिवार की स्नेह पढ़ लिखकर यूपी पुलिस में जाने की तैयारी कर रही है ।

वहीं गांव की ही एक सुमन गृहणी है। कुछ साल पहले एक एक्शन इंडिया कंपनी ने महिलाओं के मासिक धर्म में इस्तेमाल होने वाले सैनेट्री पैड बनाने का काम शुरू किया। स्नेहा को इसके लिए संपर्क किया गया और उसे मासिक धर्म के बारे में पूछा गया तो वह शरमा गई।

उसने कहा वह जानती है मगर इस बारे कुछ बोल नहीं सकती। घर जाकर उसने इस पर विचार किया और फिर फैसला किया कि वह संस्था के साथ काम करेगी। उसने हिम्मत दिखाकर परिवार के लोगों के सामने यह बात रखी। पिता ने उसकी हिम्मत बढ़ाई । मां हिचक रही थी।

मगर  स्नेहा ने मां उर्मिला को समझाया कि जो पैसे मिलेंगे उससे वह कोचिंग का खर्चा निकाल लेगी। रिश्ते की भाभी सुमन एक्शन इंडिया संस्था के लिए काम करती थी। संस्था गांव में पैड बनाने की मशीन लगाने वाली थी।  इसके बाद स्नेह ने न केवल खुद काम करना शुरू किया बल्कि अपनी चार सहेलियों को उस काम में लगा लिया।

इसके बाद संस्था की हापुड़ कॉर्डिनेटर शबाना के साथ कुछ विदेशी आ गए। उन्होंने बताया कि महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर फिल्म बनानी है। स्नेह ने साहस जुटाया और फिल्म काम करने के लिए माता-पिता को मना लिया। गांव में फिल्म पीरियड एंड ऑफ सैंटेस की शूटिंग हुई और विदेशी वापस लौट गए।

ज्ञात हो कि करीब एक साल बाद पता चला कि फिल्म ऑस्कर के लिए नामित हुई है। एक्शन इंडिया की कोर्डिनेटर शबाना बताती है कि जिसके लिए दो महिलाएं आपस में बात बंद कर देती है तीसरी महिला के आने पर, उसको लेकर दृष्य दिखाया जाना था।

फिल्म में दर्शाया कि मासिक धर्म के कपड़े कैसे छिपाती है, और आज भी देहात की महिला मासिक धर्म को लेकर भ्रांति में जी रही है। न जागरुकता है और न ही उससे होने वाली बीमारियों का पता है। बताती है कि इस फिल्म को दर्शाने के लिए बड़े डर से काम किया गया था।

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