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राजस्थान में बर्बाद नहीं हुई एक भी बूंद वैक्सीन, बिहार में सबसे ज़्यादा बर्बादी: लोकसभा में सरकार का जवाब

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नई दिल्ली. मई के आखिऱी हफ़्ते में मीडिया में कई ऐसी ख़बरें आई थीं, जिनमें राजस्थान में वैक्सीन की कऱीब 500 शीशियों को कूड़े में फेंका हुआ दिखाया गया था. रिपोर्ट आने के बाद तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर उन आरोपों की जांच करवाने को कहा था.

क्या आप जानते हैं देश के किस राज्य में सबसे ज़्यादा वैक्सीन बर्बाद हुआ? स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वैक्सीन की बर्बादी का आंकड़ा आज लोकसभा में पेश किया. आंकड़ों में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. एक मई से तेरह जुलाई के बीच देशभर में सबसे ज़्यादा वैक्सीन बिहार में बर्बाद हुआ. मंत्रालय के मुताबिक़ बिहार में इस दौरान वैक्सीन की 1, 26, 743 डोज़ बेकार हो गई जो देशभर में सबसे ज़्यादा है.

बिहार के बाद सबसे ज़्यादा वैक्सीन की बर्बादी हुई जम्मू कश्मीर में जहां वैक्सीन की 32,680 डोज़ बेकार चली गई. तीसरे नम्बर पर त्रिपुरा रहा जहां 27,552 डोज़ की बर्बादी हुई जबकि चौथे स्थान पर दिल्ली रहा जहां 19,989 डोज़ बेकार हो गई. बड़े राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में वैक्सीन की 13,207 डोज़ किसी काम नहीं आ सकी. कुल मिलाकर 1 मई से 13 जुलाई तक वैक्सीन की 2,49,648 डोज़ बर्बाद हुई.

ख़बरों के विपरीत आकडों से पता चलता है कि राजस्थान में वैक्सीन की एक भी डोज़ बर्बाद नहीं हुई. मई के आखिऱी हफ्ते में ऐसी खबरें आई थीं जिसमें राजस्थान में वैक्सीन की बर्बादी का जि़क्र हुआ था. इनके बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर इसकी जांच करने को कहा था. हालांकि राज्य सरकार उन ख़बरों को ग़लत बताया था.

लोकसभा में आंकड़े पेश होने के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोल गहलोत ने ट्वीट किया, आज लोकसभा में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि राजस्थान में कोई वैक्सीन डोज बर्बाद नहीं हुई बल्कि 13 जुलाई  तक 2.46 लाख वैक्सीन डोज अतिरिक्त लगाई गईं. यह उन लोगों के लिए करारा जवाब है जिन्होंने वैक्सीन बर्बादी के झूठे आरोप लगाकर हमारे हेल्थ वर्कर्स का मनोबल गिराया था.

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ कई राज्य ऐसे भी हैं जिन्होंने वैक्सीन का अधिकतम इस्तेमाल किया. उदाहरण के लिए , तमिलनाडु ऐसा राज्य है जिसने वैक्सीन डोज़ की अधिकतम क्षमता का इस्तेमाल करते हुए 5,88,243 डोज़ ज़्यादा दिए. वहीं गुजरात ने भी क्षमता से 4,62,819 डोज़ ज़्यादा दिए. बंगाल ने भी क्षमता से 4,87,147 ज़्यादा डोज़ दिए.

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