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मायावती बोलीं- दलितों की जबर्दस्त एकता से घबराई, मोदी सरकार इस नौबत तक आई

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लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आज ‘नक्सल समर्थकों  के नाम पर देश भर में कई राज्यों में पुणे पुलिस द्वारा की गई छापेमारी और फिर उस क्रम में कवि, महिला वकील, प्रोफेसर आदि बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि वास्तव में इस प्रकार की सरकारी आतंक की घटनाओं के माध्यम से बीजेपी की सरकारें अपनी घोर विफलताओं पर से लोगों का ध्यान बांटना चाहती है, लेकिन इस प्रकार की द्वेषपूर्ण  कार्रवाइयों से लोगों में व्यापक आक्रोश को स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भीमा-कोरेगाँव (पुणे) में द्विशताब्दी कार्यक्रम के अवसर पर इस वर्ष जनवरी में दलितों की  ज़बर्दस्त एकजुटता वहाँ की बीजेपी सरकार को पसन्द नहीं आई और फिर समारोह की समाप्ति के बाद हिंसा फैलाई गई और अब उसकी आड़ में देश के दलितों, आदिवासियों व पिछड़ों आदि पर हो रहे शोषण, अन्याय-अत्याचार व जमीन से बेदखली आदि के खिलाफ कोर्ट-कचहरी आदि में भी लगातार संघर्ष करने वाले बुद्धिजीवियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं व इस प्रकार के एन.जी.ओ. आदि चलाने वालों पर सरकारी आतंक व भय फैलाने के लिये देश भर में कल जो गिरफ्तारियाँ की गई हैं वे बीजेपी सरकार की निरंकुशता व सत्ता के दुरूपयोग की प्रकाष्ठा है, जिसकी जितनी भी निन्दा की जाये वह कम है।

इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि भीमा-कोरेगाँव में हिंसा के सम्बन्ध में जिन लोगों के खिलाफ पुलिस में एफ.आई.आर. हैं उन्हें गिरफ्तार करके न्याय की व्यवस्था को बहाल करने के बजाय इसकी आड़ में उन विख्यात लोगों को टारगेट किया जा रहा है जो दलितों, आदिवासियों व पिछड़ों आदि के हित के लिये हर प्रकार का संघर्ष करते रहे हैं और जिनका सार्वजनिक जीवन वास्तव में एक खुली किताब की तरह से लोगों के सामने है। इसके अलावा इन महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं व अन्य बुद्धिजीवी लोगों पर बीजेपी सरकार द्वारा ’नफरत फैलाने’ का आरोप भी काफी बेतुका व विद्वेषपूर्ण लगता है। सरकार को ऐसी लोकतंत्र-विरोधी हरकतों से बचना चाहिये।

साथ ही कहा कि बीजेपी सरकार का यह तर्क भी कि ’’पी.एम. मोदी की हत्या की साज़िश रचने के आरोप में छः राज्यों में छापे व 5 प्रमुख लोगों की गिरफ्तारियाँ हुई हैं,’’ गुजरात में बीजेपी सरकार के उस दौर की याद दिलाता है जब मुख्यमंत्री की हत्या की साजिश को विफल करने की आड़ में लगातार फर्जी पुलिस इंकाउण्टर हुआ करते थे। बीजेपी सरकारों को अपनी जनविरोधी नीति के साथ-साथ अपनी लोकतंत्र विरोधी गलत नीति व कार्यप्रणाली से भी बचना चाहिय,े यह वक्त की जरूरत व बी.एस.पी. की माँग है।

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