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गलवान में चीनी घुसपैठ पर उठे सवाल, पीएम मोदी के बयान पर पीएमओ ने यह कहा

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नई दिल्ली. चीन के साथ सीमा पर चल रहे तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में यह दावा किया था कि हमारी जमीन में कोई न घुसा है, न घुसा था. इस बयान को आधार बनाकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि पीएम ने चीन के आक्रामक रवैये के सामने देश की जमीन सरेंडर कर दी है. राहुल ने कई सवाल भी खड़े किए. इन तमाम सवालों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से सफाई दी गई है.

सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री के बयानों को लेकर विवाद होता देख सरकार ने सफाई दी है. सरकार ने पीएम के बयान को तोड़-मरोड़कर व्याख्या करने के प्रयास का आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ने यह साफ कर दिया था कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर हमारी तरफ स्ट्रक्चर खड़ा करने की चीनी कोशिशें 16 बिहार रेजिमेंट के जवानों ने बहादुरी दिखाते हुए नाकाम कर दी थीं. हमारे जवानों की बहादुरी के चलते हमारी सीमा में चीन की कोई मौजूदगी नहीं है.

सरकार की ओर से कहा गया है कि भारत का क्षेत्र कितना है, यह हमारे नक्शे से स्पष्ट है. सरकार इसकी रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है. सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि सर्वदलीय बैठक में इस पर भी जानकारी दी गई कि पिछले 60 साल में 43000 वर्ग किलोमीटर भूभाग पर कब्जा किया गया है, जिसकी जानकारी देश को है. हम एलएसी पर एकतरफा परिवर्तन नहीं करने देंगे. एलएसी में बदलाव की किसी भी कोशिश का भारत मजबूती से जवाब देगा. ऐसी चुनौतियों का भारतीय सेना पहले की अपेक्षा मजबूती से सामना करती है.

पीएमओ की ओर से कहा गया है कि सर्वदलीय बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि इस बार चीनी सेना इस बार कहीं अधिक ताकत के साथ एलएसी पर आई. यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 15 जून को गलवान में हिंसा हुई थी, क्योंकि चीनी सैनिक एलएसी पर संरचना खड़ा कर रहे थे और इस तरह के कार्य से रोकने पर मानने से इनकार कर दिया. प्रधानमंत्री के बयान 15 जून को गलवान में हुई घटना पर आधारित थे, जिसमें 20 सैनिकों की जान चली गई थी.

सरकार की ओर से कहा गया है कि ऐसे समय में, जब हमारे बहादुर सैनिक हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनका मनोबल कम करने के लिए अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है. पीएम के बयान पर खड़े किए जा रहे विवाद को प्रोपेगैंडा बताते हुए सरकार ने कहा है कि इससे भारतीयों की एकजुटता को कम नहीं किया जा सकता.

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