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डेल्टा वैरिएन्ट को लेकर यूरोपियन एजेंसी का दावा, सच साबित होगा या फिर महज छलावा

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नई दिल्ली। एक कहावत है “ज्यें ज्यों इलाज किया मर्ज बढ़ता ही गया” ये कहावत मौजूदा हालातों में कोरोना महामारी पर एक दम ही सटीक बैठ रही है क्योंकि पूरी दुनिया के तमाम मुल्क जितनी इससे पार पाने की कोशिश करते हैं हर बार कोरोना वॉयरस न सिर्फ अपना रूप बदल ले रहा है बल्कि पहले से भी ज्यादा ताकतवर और खतरनाक स्वरूप में सामने आकर उन तमाम कोशिशें पर पानी फेर दे रहा है। इस महामारी के दौरान महज सवा साल में ही इसके कई वैरिएन्ट और म्यूटेशन जिस तरह से सामने आते जा रहे हैं वो जहां दुनिया भर के तमाम वैज्ञानिकों के लिए हर बार एक नई चुनौती पैदा कर रहे हैं वहीं दुनिया भर के लोगों को दहशत से उबरने ही नही दे रहे हैं।

गौरतलब है कि कोरोना के डेल्टा वेरिएंट को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। यूरोपीय यूनियन की एजेंसी यूरोपीय सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) ने बुधवार को दावा किया है कि यूरोप में अगस्त के आखिर तक 90 फीसदी मामले डेल्टा वेरिएंट के होंगे। बता दें कि डेल्टा वेरिएंट के कारण ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस समेत कई देशों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इन सभी देशों में कोरोना वैक्सीन टीकाकरण की तेज रफ्तार के बावजूद संक्रमण के मामलों में तेजी देखी जा रही है।अनुमान है कि डेल्टा वैरिएंट (B.1.617.2), अल्फा वैरिएंट (Β.1.1.7) की तुलना में 40 से 60 फीसदी अधिक तेजी से फैल रहा है। अल्फा वैरिएंट पहली बार ब्रिटेन में मिला था।

इतना ही नही भारत में बुधवार तक कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप में नए म्यूटेशन वाले वायरस के 40 नए मामले मिले। यह नया स्वरूप डेल्टा प्लस कहा जा रहा है, जिसमें के417एन म्यूटेशन है। इससे बचाव के लिए राज्यों को संक्रमितों की जांच और टीकाकरण बढ़ाने की सिफारिश की गई है। वायरस के डेल्टा स्वरूप में म्यूटेशन से बने नए स्वरूप को डेल्टा प्लस कहा जा रहा है। इसके बारे में सबसे पहले 11 जून को इंग्लैंड के पब्लिक हेल्थ बुलेटिन में बताया गया। यह भारत में पहले मिले डेल्टा स्वरूप के उपवंश का माना जा रहा है। इसमें के417एन नामक स्पाइक प्रोटीन का म्यूटेशन है। यह म्यूटेशन दक्षिण अफ्रीका में मिले वायरस के बीटा स्वरूप में मिला था। वैज्ञानिकों को चिंता है कि डेल्टा प्लस स्वरूप डेल्टा से ज्यादा संक्रामक हो सकता है। देश के प्रमुख वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील के अनुसार डेल्टा प्लस में मौजूदा एंटीबॉडी को चकमा देने की क्षमता हो सकती है।

अब तक मिली रिपोर्टों के मुताबिक पिछले हफ्ते तक डेल्टा प्लस के 190 मामले सामने आ चुके थे। इनमें से ब्रिटेन में 36, जापान में 15, नेपाल में 3, पोलैंड में 9, पुर्तगाल में 22, स्विट्जरलैंड में 18 और अमेरिका में 83 मामले थे। भारत में अब तक 40 मामलों की पुष्टि हुई है, जो महाराष्ट्र, केरल और मध्य प्रदेश में हैं। देश में डेल्टा प्लस का पहला मामला 5 अप्रैल को लिए सैंपल में था। वहीं ब्रिटेन में 26 अप्रैल को लिए 5 सैंपलों में इनकी पुष्टि हुई। यह सैंपल नेपाल और तुर्की से लौटे नागरिकों के संपर्क में आए लोगों के थे।

इस सबके बीच डब्ल्यूएचओ के महामारी विज्ञानी के हालिया बयान ने लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है। उन्होंने बताया, कोरोना के डेल्टा वेरिएंट्स पर कोविड वैक्सीन की प्रभाविकता बहुत ज्यादा नहीं देखी जा रही है। कोरोना का यह वेरिएंट हमारे लिए चिंता का विषय बना हुआ है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि वैक्सीन इस वेरिएंट के खिलाफ कम प्रभावी हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ के महामारी विज्ञानी के इस बयान ने वायरस से लोगों में डर को और बढ़ा दिया है। ज्ञात हो कि भारत में दूसरी लहर के दौरान देखी गई तबाही के पीछे इसी वेरिएंट को मुख्य कारण माना जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक डेल्टा वेरिएंट में म्यूटेशन के साथ अब यह डेल्टा प्लस में बदल गया है, जिसका असर और भी गंभीर हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ के महामारी विशेषज्ञ के बयान से बढ़ी चिंताओं के बीच स्पुतनिक-वी वैक्सीन निर्माताओं के दावे ने थोड़ी सुकून जरूर दी है। स्पुतनिक-वी विकसित करने वाली संस्था ‘गैमेलिया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी’ के प्रमुख अलेक्जेंडर गिंट्सबर्ग ने कहा है कि स्पुतनिक-वी वैक्सीन कोविड-19 के सभी ज्ञात वेरिएंट्स के खिलाफ प्रभावी है। इस वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज यूके वेरिएंट्स से लेकर डेल्टा तक, सभी में बेहतर सुरक्षा दे सकती हैं। 

मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ बायोकेमिस्ट्री के प्रोफेसर सुभ्रदीप कर्माकर ने बताया है कि कोरोना के अब तक के मिले वेरिएंट्स में डेल्टा प्लस वेरिएंट से लोगों को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। यह नया वेरिएंट अधिक संक्रामक हो सकता है। भारत में फिलहाल डेल्टा प्लस वेरिएंट्स के मामले बहुत कम है। इसे अभी भी वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट के रूप में वर्गीकृत किया गया है, वेरिएंट ऑफ कंसर्न नहीं। इससे बचाव के सभी उपायों को प्रयोग में लाकर सुरक्षित रहा जा सकता है।

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