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नई दवा से बढ़ सकेगी याददाश्त! ब्रेन की बीमारियों का इलाज भी संभव – रिसर्च

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इंसान की याददाश्त बढ़ाने को लेकर कई तरह की कोशिश की जाती रही हैं. दुनियाभर के साइंटिस्ट भी ब्रेन के इस रहस्य को समझने और इससे संबंधित अन्य बीमारियों के इलाज की खोज में जुटे हुए हैं. अब साइंटिस्टों ने न्यूरल सर्किट को टारगेट कर एक दवा तैयार की है, जो याददाश्त को एन्कोड कर सकती है और इससे ब्रेन से संबंधित अन्य बीमारियों का बेहतर इलाज का रास्ता भी निकल सकता है. यूनिवर्सिटी आफ ब्रिस्टल के साइंटिस्टों द्वारा की गई ये नई रिसर्च नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित हुई है.

बता दें कि ज्यादातर न्यूरोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर में मेमोरी का कमजोर पड़ना मुख्य लक्षण होता है. अल्जाइमर और सिजोफ्रेनिया जैसी बीमारियों में भी यही होता है. इसी तरह से स्मृति लोप की बीमारियों का इलाज अब तक बहुत ही सीमित है. इसीलिए बेहतर और सुरक्षित इलाज की खोज लगातार जारी है, लेकिन इस दिशा में अभी तक सीमित सफलता ही मिल पाई है.

इंटरनेशनल बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी सोसई हेप्टारेस के सहयोग से की गई ताजा स्टडी में खास रिसेप्टर न्यूरो ट्रांसमीटर एसिटाइलकोलाइन की पहचान की गई है, जो मेमोरी सर्किट के जरिये प्रवाहित होकर सूचनाओं के लिए मार्ग निर्धारित करता है. एसिटाइलकोलाइन सीखने के दौरान मस्तिष्क में डिस्चार्ज होता है और ये नई यादों या स्मृतियों को हासिल करने में महत्वपूर्ण है.

रिपोर्ट में आगे लिखा है, याद या स्मरण की कमजोरी वाले अल्जाइमर रोग या उसके लक्षण का जो इलाज उपलब्ध है, उसमें ऐसी दवाइयों का प्रयोग किया जाता है, जो एसिटाइलकोलाइन को बढ़ाता है. लेकिन इसके कई साइड इफेक्ट भी देखने को मिलते हैं. इस कारण खास रिसेप्टर टारगेट की खोज का पॉजिटिव असर होगा और इलाज के दुष्प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा.

नई राह खोल सकती है ये खोज

यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के सेंटर फार सिनैप्टिक प्लास्टिसिटी के प्रोफेसर और इस रिसर्च के मेन राइटर जैक मेलोर ने बताया, “ये निष्कर्ष ब्रेन में याद या स्मरण के एन्कोडिंग की बुनियादी प्रक्रियाओं से संबंधित है कि ये मस्तिष्क में किस प्रकार से नियंत्रित होते हैं या फिर कोई दवा किस प्रकार से खास रिसेप्टर प्रोटीन को लक्षित कर सकेगी. आने वाले समय में खास तरह के लक्ष्य की यह खोज अल्जाइमर जैसे रोगों के लक्षणों के उभरने पर इलाज की नई राह खोल सकती है. इसके अलावा अन्य संज्ञानात्मक कमजोरी वाले विकारों का भी बेहतर इलाज मिल सकता है.”

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