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वैज्ञानिकों को चिडिय़ा के ब्रेन सिग्नल पढऩे में कामयाबी मिली, इससे बोल न पाने वाले इंसानों के मन की बात समझी जा सकेगी

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लंदन. आवाज खो चुके लोग भी अब अपने मन की बात आसानी से दूसरों तक पहुंचा सकेंगे. इसके लिए जेबरा चिडिय़ा के ब्रेन सिग्नल का इस्तेमाल किया जाएगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक न बोल सकने वाले लोगों में और एक विशेष प्रकार की चिडिय़ा के ब्रेन सिग्नल में कई समानताएं मिली हैं.

अब वैज्ञानिक एक ऐसा डिवाइस बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे मूक बधिर लोग भी अपनी भावनाएं सिग्नल के जरिए व्यक्त कर सकें. यह कारनामा अमेरिका के सैन डिएगो की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कर दिखाया है. इसकी टेस्टिंग जेबरा नाम की चिडिय़ों पर की गई है.

सिलिकॉन इम्प्लांट्स की मदद से रिकॉर्ड किए सिग्नल

नर जेबरा चिडिय़ा जब गाना गा रही थी, तो वैज्ञानिकों ने सिलिकॉन इम्प्लांट्स की मदद से उसके ब्रेन सिग्नल को रिकॉर्ड कर लिया. फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह भविष्यवाणी की गई कि चिडिय़ा अगला गाना कौन सा गा सकती है. वैज्ञानिकों ने दावा किया कि, इसी भविष्यवाणी करने के तरीके से उन लोगों के मन की बात को समझा जा सकता है, जो बोल नहीं सकते. इससे तकनीक को एक डिवाइस में तब्दील किया जा सकेगा और पता चल सकेगा कि वो क्या कहना चाहते हैं.

मरीजों की नई आवाज बनेगी तकनीक

वर्तमान में ऐसे आर्ट इम्प्लांट्स मौजूद हैं, जो लोगों की आवाज को सुनकर शब्दों में तब्दील कर सकते हैं, लेकिन हमारी नई तकनीक उनके ब्रेन को समझकर उनकी नई आवाज बनेगी. शोधकर्ता डेरिल ब्राउन का कहना है, चिडिय़ों के ब्रेन सिग्नल ने न बोल पाने वाले लोगों के लिए नया रास्ता दिखाया है. हम बर्ड सॉन्ग का अध्ययन कर रहे हैं, जो इंसानी कम्युनिकेशन को समझने में मदद करेगा.

चिडिय़ों से इंसान को कैसे मदद मिलेगी

शोधकर्ताओं का कहना है, चिडिय़ों का गाने का तरीका और इंसान की आवाज में कई समानताएं हैं. जैसे- दोनों ही इसे धीरे-धीरे सीखते हैं. दूसरे जानवरों के शोर के मुकाबले भी इसे समझना ज्यादा कठिन है. रिसर्च के दौरान किए गए प्रयोग से यह जान पाए हैं कि ब्रेन को समझकर कैसे उसकी आवाज बनाई जा सकती है.

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