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लेबर वेलफेयर बोर्ड में घोटाले का बवाल, फिर एक मुसीबत में फंसे केजरीवाल

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नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक अलग नजर आने की कोशिश और साफ सुथरी सोच के साथ लगातार दूसरी बार दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने वाली आम आदमी पार्टी और उसके अलम्बरदार अरविंद केजरीवाल अब दोनों ही दिन प्रतिदिन आपनी साख गंवाते जा रहे हैं क्योंकि हाल में जिस तरह से तमाम मामले सामने आये और आते ही जा रहे हैं उससे आप और उनके मुखिया केजरीवाल मुसीबतों में घिरते जा रहे हैं और लोगों की नजर में गिरते ही जा रहे हैं।

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार पर अवैध रूप से दिल्ली निर्माण बोर्ड का गठन और कंस्ट्रक्शन लेबर फंड में 139 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने दिल्ली लेबर वेलफेयर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष की शिकायत पर श्रम विभाग के खिलाफ छह धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी पर एक बार फिर घोटाले की तलवार लटक रही है। इस बार दिल्ली सरकार पर दिल्ली लेबर वेलफेयर बोर्ड में फर्जी श्रमिकों के पंजीकरण को लेकर 139 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा है। आरोप है कि  सरकार ने कंस्ट्रक्शन लेबर फंड में 139 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। जिसके तहत श्रम मंत्रालय ने फर्जी तरीकों से कई कामकाजी लोगों का दिल्ली लेबर वेलफेयर बोर्ड मे पंजीकरण करा दिया।

बताया जाता है कि इस शिकायत में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने आम आदमी पार्टी के वॅालेंटियर्स को फर्जी श्रमिक बनाकर इस घोटाले को अंजाम दिया हैं। आपको बता दें कि नियम के मुताबिक किसी भी कंपनी में काम करने वालों का लेबर वेलफेयर बोर्ड में पंजीकरण नहीं कराया जा सकता है।  दरअसल यह घोटाला उस वक्त सामने आया जब दिल्ली लेबर वेलफेयर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष व मजदूर नेता सुखबीर शर्मा ने दिल्ली की भष्ट्रचार निरोधक शाखा यानी (एसीबी) में दिल्ली सरकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई कि कंस्ट्रक्शन लेबर फंड में 139 करोड़ रुपये का घोटाला किया है।

वहीं सुखबीर शर्मा की शिकायत के बाद एसीबी ने दिल्ली सरकार के खिलाफ इस मामले में आईपीसी की धारा 420,468,471 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। सुखबीर शर्मा ने अपनी शिकायत में आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने केवल वोट बैंक के खातिर नियमों को दरकिनार करते हुए ऐसा कदम उठाया है।

बता दें कि 2002 में दिल्ली लेबर वेलफेयर बोर्ड का गठन किया गया था। इसमें कंस्ट्रक्शन या अन्य साइटों पर काम करने वाले मजदूरों का बोर्ड में पंजीकरण करने का प्रावधान है। दिल्ली लेबर वेलफेयर बोर्ड में पंजीकरण होने पर सरकार की तरफ से मजदूरों को 17 तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। जिसमें मजदूरों के बच्चों की पढ़ाई, मजदूरों की पत्नी व महिला मजदूरों को मातृत्व व शादी में पैसे दिए जाने की सुविधाएं मौजूद है।  जबकि दिल्ली सरकार ने कई लोगों को अवैध तरीके से बोर्ड में पंजीकरण कराया। नौकरी करने वालों से लेकर बिजनेसमैन तक को कागजों पर श्रमिक बना दिया गया।

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