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अपनी धमकी को बनाने के लिए असरदार, घाटी में आतंकियों ने 3 एसपीओ दिये मार

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श्रीनगर। घाटी में आतंकियों ने अपनी धमकी को असरदार बनाने के लिए आखिरकार बेहद ही कायराना और घिनौना खेल शुरू कर दिया है जिसके तहत आज सुबह हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां में पहले 3 एसपीओ(स्पेशल पुलिस अफसर) समेत 4 लोगों को अगवा किया और उसके सभी पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी।

गौरतलब है कि इन आतंकियों की इस वहशियाना हरकत का असर बखूबी दिखने भी लगा है क्योंकि इस वारदात के बाद घाटी में इतनी दहशत है कि अब तक 5 एसपीओ अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं।  वहीं इस्तीफा देने वालो अफसरों ने वीडियो डालकर इस बात की जानकारी दी है। इन अफसरों में नवाज अहमद लोन, शबीर अहमद ठोकर, नसीर अहमद भट, तजल्ला हुसैन लोन और इरशाद अह बाबा हैं।

बताया जाता है कि जम्मू कश्मीर के शोपियां से शुक्रवार सुबह जिन 3 पुलिसकर्मियों को आतंकियों ने अगवा किया था उनकी हत्या कर दी है, वहीं एक एसपीओ के भाई को रिहा कर दिया है। बताया जा रहा है कि जिन पुलिसवालों का अपहरण हुआ है उनमें 3 एसपीओ यानी स्पेशल पुलिस अफसर थे और एक एसपीओ का भाई है। पुलिसवाले शोपियां के दो गांवों से अगवा किए गए हैं जिसमें कापरीन और बतागुंड शामिल हैं। पुलिसवालों के गायब होने के बाद उन्हें ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

ज्ञात हो कि अभी हाल ही में हिजबुल मुजाहिदीन के मुखिया रियाज नेको ने कश्मीर के स्पेशल पुलिस अफसरों को आगाह किया था कि वह अपनी नौकरी छोड़ दें। आतंकी संगठन ने फिलहाल एसपीओ पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाया है और सियासी कार्यकर्ता भी निशाने पर हैं। शोपियां में जो तीन पुलिसकर्मी और 1 नागरिक अगवा किए गए हैं उनकी पहचान एसपीओ फिरदौस अहमद, एसपीओ कुलदीप सिंह, एसपीओ निसार अहमद धोबी, फयाज अहमद भट(निसार अहमद का भाई) के रूप में हुई है।

वहीं इस दुखद घटना पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया है कि तीन और पुलिसकर्मी आतंकियों की गोली का शिकार हो गए। हम सब इस पर शोक, गुस्सा, हैरानी व सांत्वना व्यक्त करेंगे। दुर्भाग्य से इससे मृतकों के परिवार को कोई शांति नहीं मिलती। महबूबा ने अगले ट्वीट में लिखा कि, पुलिसकर्मियों के अपहरण की बढ़ती घटनाओं से ये साफ होता है कि केंद्र सरकार की बल प्रयोग करने की नीति काम नहीं आ रही है। इसका हल अब सिर्फ बातचीत ही नजर आता है।

हालांकि आतंकियों की इस हरकत को पंचायत चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आतंकी नहीं चाहते कि राज्य में पंचायत चुनाव हो। यही वजह है कि पंचायत चुनाव की घोषणा के मात्र 24 घंटे के अंदर चार पंचायत घरों को आग लगा दी गई थी जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं। ऐसे में इस तरह पुलिसकर्मियों का गायब होना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल है।

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