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रॉफेल सौदे पर: SC ने दी मोदी सरकार को क्लीन चिट, राहुल के तमाम दावों की गई भद्द पिट

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नई दिल्ली। पिछले काफी समय से रॉफेल को लेकर जारी आरोप प्रत्यारोपों पर देश की सर्वोच्च अदालत ने बखूबी पूर्ण विराम लगाते हुए केन्द्र की मोदी सरकार को रॉफेल डील मामले में आज शुक्रवार को क्लीन चिट दे दी है।  दरअसल सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है।

गौरतलब है कि आज प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश इन विमानों के बगैर नहीं रह सकता है। तीन सदस्यीय पीठ की तरफ से फैसला पढ़ते हुए प्रधान न्यायाधीश गोगोई ने कहा कि लड़ाकू विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है।

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि कीमतों के तुलनात्मक विवरण पर फैसला लेना अदालत का काम नहीं है। पीठ ने कहा कि खरीदी, कीमत और ऑफसेट साझेदार के मामले में हस्तक्षेप के लिए उसके पास कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। अदालत की निगरानी में राफेल सौदे की जांच कराने की मांग करने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।

ज्ञात हो कि पिछले काफी समय से राफेल सौदे को लेकर विपक्ष मोदी सरकार को आड़े हाथ लेता आ रहा है। खासकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमूमन हर रैली और हर संबोधन में सरकार पर इस सौदे को लेकर हमला किया है। उनका कहना है कि अनिल अंबानी को जानबूझकर इस सौदे का ऑफसेट पार्टनर बनाया गया है जबकि पहला यह सौदा फ्रांस की दसॉल्ट का एचएएल के साथ होना था।

जिसे देखते ही इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं जिसे आज न्यायालय ने खारिच कर दिया और इस सौदे को हरी झंडी दे दी है। न्यायालय के फैसले ने जहां सरकार को बहुत बड़ी राहत दी है वहीं विपक्ष के लिए यह तगड़ा झटका है। अब विपक्ष इसकी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) जांच करवाने की मांग कर रहा है।

आइये देखें एक नजर ब्योरेवार कि इस मामले में कब कब क्या हुआ:

  • 30 दिसंबर, 2002 : खरीदी प्रक्रिया को दुरुस्त करने के लिए रक्षा खरीदी प्रक्रिया (डीपीपी) अपनाई गई।
  • 28 अगस्त, 2007 : रक्षा मंत्रालय ने 126 एमएमआरसीए लड़ाकू विमान खरीदने के लिए प्रस्ताव अनुरोध जारी किया।
  • चार सितंबर, 2008 : मुकेश अंबानी नीत रिलायंस समूह ने रिलायंस एरोस्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (आरएटीएल) का गठन किया।
  • मई 2011 : भारतीय वायुसेना ने राफेल और यूरो लड़ाकू विमानों को शॉर्टलिस्ट किया।
  • 30 जनवरी, 2012 : दसाल्ट एविएशंस के राफेल विमानों ने सबसे कम मूल्य का निविदा पेश किया।
  • 13 मार्च, 2014 : हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड और दसाल्ट एविएशन के बीच 108 विमानों को बनाने को लेकर समझौता हुआ। इसके तहत दोनों कंपनियां क्रमश: 70 प्रतिशत और 30 प्रतिशत काम के लिए जिम्मेदार होंगी।
  • आठ अगस्त, 2014 : तत्कालीन रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने संसद को बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के 3-4 साल के भीतर प्रयोग के लिए पूरी तरह से तैयार 18 विमान प्राप्त हो जाएंगे। बाकि के 108 विमान अगले सात साल में मिलने की संभावना है।
  • आठ अप्रैल, 2015 : तत्कालीन विदेश सचिव ने कहा कि दसाल्ट, रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच विस्तृत बातचीत चल रही है।
  • 10 अप्रेल, 2015 : फ्रांस ने प्रयोग के लिए पूरी तरह से तैयार 36 विमानों के नए सौदे की घोषणा की।
  • 26 जनवरी, 2016 : भारत और फ्रांस ने 36 लड़ाकू विमानों के लिए सहमतिपत्र पर हस्ताक्षर किया।
  • 23 सितंबर, 2016 : भारत-फ्रांस की सरकारों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर।
  • 18 नवंबर, 2016 : सरकार ने संसद को बताया कि प्रत्येक राफेल विमान की कीमत करीब 670 करोड़ रुपये होगी और सभी विमान अप्रैल 2022 तक प्राप्त हो जाएंगे।
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