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लॉकडाउन पर सोनिया गांधी – सारी शक्तियां पीएमओ तक सीमित, केंद्र के पास नहीं ठोस रणनीति

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नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में शुक्रवार 22 मई को विपक्षी दलों की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक हुई, जिसमें कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के बीच प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों एवं आर्थिक पैकेज पर मुख्य रूप से चर्चा की गयी. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लॉकडाउन से बाहर आने के लिए सरकार के पास कोई रणनीति नहीं होने का दावा किया.

उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के इस समय भी सारी शक्तियां प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक सीमित हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस सरकार में संघवाद की भावना को भूला दिया गया है और विपक्ष की मांगों को अनसुना कर दिया गया. उन्होंने कहा, कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध को 21 दिनों में जीतने की प्रधानमंत्री की शुरुआती आशा सही साबित नहीं हुई. ऐसा लगता है कि वायरस दवा बनने तक मौजूद रहने वाला है. मेरा मानना है कि सरकार लॉकडाउन के मापदंडों को लेकर निश्चित नहीं थी . उसके पास इससे बाहर निकलने की कोई रणनीति भी नहीं है.

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा करने और फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पांच दिनों तक इसका ब्यौरा रखे जाने के बाद यह एक क्रूर मजाक साबित हुआ.सोनिया के मुताबिक, हममें से कई समान विचारधारा वाली पार्टियां मांग कर चुकी हैं कि गरीबों के खातों में पैसे डाले जाएं, सभी परिवारों को मुफ्त राशन दिया जाए और घर जाने वाले प्रवासी श्रमिकों को बस एवं ट्रेन की सुविधा दी जाए.

उन्होंने कहा, हमने यह मांग भी की थी कि कर्मचारियों एवं नियोजकों की सुरक्षा के लिए वेतन सहायत कोष बनाया जाए. हमारी गुहार को अनसुना कर दिया गया. उन्होंने कहा, कई जानेमाने अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि 2020-21 में हमारे देश की विकास दर -5 प्रतिशत हो सकती है. इसके नतीजे भयावह होंगे. सोनिया ने कहा, मौजूदा सरकार के पास कोई समाधान नहीं होना चिंता की बात है, लेकिन उसके पास गरीबों एवं कमजोर वर्ग के लोगों के प्रति करूणा का नहीं होना हृदयविदारक बात है.

उन्होंने आरोप लगाया, सरकार ने खुद के लोकतांत्रिक होने का दिखावा करना भी छोड़ दिया है. सारी शक्तियां पीएमओ तक सीमित हो गई हैं. संघवाद की भावना जो हमारे संविधान का अभिन्न भाग है, उसे भूला दिया गया है. इसका कोई संकेत नहीं है कि संसद के दोनों सदनों या स्थायी समितियों की बैठक कब बुलाई जाएगी. सोनिया ने विपक्षी दलों के नेताओं से कहा, रचनात्मक आलोचना करना, सुझाव देना, और लोगों की आवाज बनना हमारा कर्तव्य है. इसी भावना के साथ हम बैठक कर रहे हैं.

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