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पीड़िता के परिजनों का आरोप जिसको जलाया वह हमारी बेटी नहीं थी

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नई दिल्ली/हाथरस. उत्तर प्रदेश स्थित हाथरस में बलात्कार पीड़िता के परिवार ने शनिवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) पर आरोपियों के साथ ‘मिले’ होने का आरोप लगाया और मांग की है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो. दिवंगत 19 वर्षीय महिला की मां ने कहा कि उनकी मौत के बाद पुलिस ने उनकी बेटी का शव नहीं सौंपा. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच की मांग की और कहा कि परिवार को एसआईटी या सीबीआई पर भरोसा नहीं है.

मां ने कहा कि ‘इन लोगों ने मुझे भीख मांगने के बाद भी अपनी लड़की का शरीर नहीं देखने दिया. हम सीबीआई जांच भी नहीं चाहते हैं. हम चाहते हैं कि मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के जज के अधीन हो. हम नार्को टेस्ट क्यों कराएं, हमने अपना बयान कभी नहीं बदला.

बता दें कि दो दिनों के बाद हाथरस जिला प्रशासन ने शनिवार सुबह मीडिया को पीड़ित के गांव में प्रवेश करने की अनुमति दी. मीडिया से बात करते हुए पीड़िता की भाभी ने कहा, ‘सबसे पहले पुलिसवालों को स्पष्ट करना चाहिए कि उस रात किसके शव का अंतिम संस्कार किया गया था. वह हमारी लड़की का शरीर नहीं था, हमने इसे नहीं देखा. हम नार्को टेस्ट क्यों कराएं? हम सच कह रहे हैं, हम न्याय मांग रहे हैं. डीएम और एसपी का नार्को टेस्ट हो. यही लोग झूठ बोल रहे हैं.’

मृतक के दादा के शव का अंतिम संस्कार करने के समय उपस्थित होने की खबरों का खंडन करते हुए, उनकी भाभी ने कहा, ‘लड़की के दादा की मृत्यु 2006 में हुई थी. कोई कैसे दावा कर सकता है कि वह दाह संस्कार के दौरान मौजूद थे?’ उन्होंने कहा कि ‘कल एसआईटी कल (शुक्रवार को) हमारे घर नहीं आई. वे गुरुवार को आए थे और सुबह करीब 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक यहां थे. जिला मजिस्ट्रेट लगातार कह रहे हैं अगर लड़की की मौत कोरोनोवायरस से हुई है इसलिए हमें मीडिया से बातचीत करने और बाहर जाने से रोका गया है. हमारी लड़की का शरीर हमें क्यों नहीं दिखाया गया? हम SIT पर भरोसा नहीं करते क्योंकि वे प्रशासन के साथ मिले हुए हैं.’

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