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मौजूदा वक़्त में है देश बेहद थका-हारा, ऐसे में कांग्रेस ही बन सकती है सहारा- राहुल

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नई दिल्ली। आज यहां इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में कांग्रेस का 84वां महाधिवेशन शुरू हो गया जिसमें पार्टी के अगले पांच साल की दिशा-दशा तय होगी तथा इस दौरान चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इस दौरान राहुल गांधी ने इस महाधिवेशन को संबोधित करते हुए मोदी सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि आज देश को बांटने की कोशिश की जा रही है और मैं दिल से कहता हूं कि कांग्रेस पार्टी ही देश को रास्ता दिखा सकती है।

उन्होंने कहा कि महा​धिवेशन का लक्ष्य कांग्रेस और देश को आगे का रास्ता दिखाने का है।  जिसके तहत हम सबको, देश की जनता को मिलकर देश् को जोडऩे का काम करना होगा।   साथ ही उन्होंने कहा कि महाधिवेशन भविष्य की बात करता है। बदलाव की बात करता है। लेकिन हमारी परंपरा रही है कि बदलाव किया जाता है किंतु बीते समय को भूला नहीं जाता। युवाओं की बात होती है। यदि युवा कांग्रेस को आगे ले जायेंगे तो जो हमारे अनुभवी नेता है, उनके बिना हमारी कांग्रेस पार्टी आगे नहीं जा सकती।

राहुल गांधी ने इसके साथ ही कहा कि मेरा काम युवा एवं वरिष्ठ नेताओं को जोडऩे का है। एक नई दिशा दिखाने का काम है।   क्योंकि आज युवा जब मोदीजी की ओर देखता है तो उन्हें रास्ता नहीं दिखता। उन्हें यह बात समझ नहीं आती कि उन्हें रोजगार कहां से मिलेगा? किसानों को सही दाम कब मिलेगा? तो देश एक प्रकार से थका हुआ है। रास्ता ढूंढ रहा है।  इसीलिए मैं दिल से कहता हूं कि कांग्रेस पार्टी ही देश को रास्ता दिखा सकती है। अपने भाषण के अंत में उन्होंने फिर से भाजपा सरकार पर तंज कसा और बोले कि वो गुस्सा बांटते हैं और हम प्यार बांटते हैं।

गौरतलब है कि इस 84वें अधिवेशन में पार्टी की अगले पांच साल की दशा-दिशा तय होगी। जिसमें पार्टी चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित करेगी। जिसमें विदेशी, आर्थिक, बेरोजगारी और कृषि जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। क्योंकि इन चार प्रस्तावों पर शुक्रवार की रात संचालन समिति की बैठक में विचार विमर्श किया गया। इनमें राजनीतिक, आर्थिक, विदेशी मामलों तथा कृषि, बेरोजगारी एवं गरीबी उन्मूलन के विषय प्रस्ताव शामिल हैं।

इसके अलावा महाधिवेशन में कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ 5 बुकलेट जारी की और शिक्षा, रोजगार, व्यवस्था व सुरक्षा के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने नोटबंदी जीएसटी और पीएनबी मामले पर सरकार पर निशाना साधा है।इस अधिवेशन में मोदी की विजय रथ रोकने की रणनीति पर मंथन होगा। अधिेवेशन में पांच प्रस्ताव पेश किए जाएंगे जिसमें ईवीएम से चुनाव और निष्‍पक्षता के लिए बैलट पेपर से चुनाव कराने का प्रस्‍ताव भी शामिल किया जाएगा।

हालांकि पार्टी की फिलहाल जो हालत है उसको देखते हुए वह गठबंधन की राजनीति से बाहर नहीं आना चाहती है। यही वजह है कि वह गठबंधन की राजनीति के सहारे भाजपा नीत राजग को चुनौती देने की ताल भी ठोंकेगी। इस सत्र में पार्टी का पूरा फोकस जमीनी नेता और कार्यकर्ता पर ही होगा। राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला महाधिवेशन है। सत्र के पहले और दूसरे दिन 17-18 मार्च को दो-दो प्रस्‍ताव पारित किए जाएंगे। इस सत्र में भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार का विरोध और इसके मुद्दे भी इस रोडमैप का हिस्‍सा होंगे।

ज्ञात हो कि अधिवेशन में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, वरिष्ठ नेता ए के एंटनी, जनार्दन द्विवेदी तथा पार्टी के प्रदेश इकाइयों के अध्यक्ष, जिला एवं ब्लाक स्तर के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

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