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एक जनप्रतिनिधि होकर ऐसा बयान, सरकार और कानून ले स्वतः संज्ञान

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लखनऊ। अगर देश में जब-तब पैदा होते ऐसे अराजक हालातों से पार पाना है तो सबसे पहले ऐसे लोगों पर लगाम लगाना है जिनके चलते ऐसे हालात पैदा होते हैं और जो इस सबके जिम्मेदार होते हैं। हालांकि ऐसे लोगों पर आज तक कोई बड़ी और ऐसी कारवाई नही हो सकी है जो बाकियों के लिए एक मिसाल बन सके।

लेकिन अब समय आ चुका है और हालात काफी गंभीर होते जा रहे हैं लोग बेखौफ होकर खुलेआम समाज मे नफरत के बीज बोते जा रहे हैं और इन्तेहा तो तब हो जाती है जब इस तरह की बातें जनप्रतिनिधियों के मुह से आती हैं। इसी क्रम में आज अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली एक जनप्रतिनिधि ने जिस तरह से बयान दिया है उसे सरकार और कानून को स्वतः संज्ञान में लेते हुए कुछ ऐसी कारवाई करनी चाहिए जो बाकियों के लिए एक नजीर बने।

गौरतलब है कि बीजेपी सांसद सावित्री फुले ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक महारैली का आयोजन किया था। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि आरक्षण कोई भीख नहीं है बल्कि समाजिक समानता के अधिकार से जु़ड़ा मामला है।

वहीं बीजेपी सांसद फुले ने धमकी भरे लहजे में सरकार को ललकारते हुए कहा कि अगर सरकार ने आरक्षण को खत्म करने के बारे में सोचा भी तो भारत की धरती पर खून की नदियां बहेंगी। हालांकि सांसद फुले ने पिछले महीने ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि अगर केंद्र सरकार ने आरक्षण को खत्म करने की कोशिश की तो वह इसके विरोध में किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

ज्ञात हो कि जहां एक तरफ आज देश वैसे ही बंद के चलते पैदा हुए अराजक हालात से जूझ रहा था उस दौरान एक जनप्रतिनिधि द्वारा दिया गया ऐसा बयान देश और उसकी जनता के लिए उनके गैर जिम्मेदारना रवैये को दर्शाता है जो कि काफी गंभीर है। ऐसे मामलों में जब लोगों की बात करें तो उनका कहना  है कि कानून और सरकार तो जो करे सो करे उसके साथ ही हम सभी को ऐसे गैर-जिम्मेदार लोगों को चुनाव के दौरान बखूबी सबक सिखाना चाहिए।

 

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