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पड़ोसी देशों में फैलता ड्रैगन जाल! भारत को रखना होगा खास ख्याल

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काठमांडू।    भारत को अब चीन की कूटनीतिक चाल को बखूबी समझना होगा क्योंकि वह बड़े ही सधे अंदाज में हमारे देश के पड़ोसी देशों में अपना जाल बिछाने में लगा हैं और कई देशों में वह तकरीबन अपनी पैठ जमाने में बखूबी कामयाब भी हो चुका है। गंभीर बात यह है कि वह हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान से पहले ही साठगांठ करे हुए है और जब तब उसकी तरफदारी कर भारत को नीचा दिखाने में कोई कसर नही छोड़ता है ऐसे में हमे काफी सर्तक और सधे अंदाज में उसके हर ऐसे कदम की काट करनी होगी ताकि देश को किसी भी तरह के नुक्सान का सामना न करना पड़े।

गौरतलब है कि जिस तरह से अब नेपाल को इंटरनेट सेवाएं देने वाला भारत ही इकलौता देश नहीं रह गया है। चीन ने शनिवार से नेपाल में अपनी इंटरनेट सेवाएं देना शु्रू कर दी। नेपाल में चीन की इंटरनेट सेवाएं शुरू होने के साथ ही नेपाल के इंटरनेट बाजार पर भारत का एकाधिकार समाप्त हो गया। रिपोर्ट के अनुसार चीन की चाइना टेलीकॉम ग्लोबल (सीटीजी) नेपाल टेलीकॉम के साथ मिलकर नेपाल में वैकल्पिक इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराएगा। अभी तक नेपाल भारतीय दूरसंचार आपरेटर्ज के ऑप्टिकल फाइबर कनेक्शन माध्यम से ही वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। नेपाल के सूचना एवं संचार मंत्री मोहन बहादुर बासनेत ने नेपाल-चीन सीमा पार ऑप्टिकल फाइबर लिंक का यहां एक कार्यक्रम में उद्घाटन किया। सीटीजी द्वारा वर्ष 2016 में टेरेस्टियल फाइबर केबल प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई। यह सीमावर्ती जिलांग (रसुवगढ़ी) गेटवे के माध्यम से नेपाल को चीन से जोड़ेगी। नेपाल की मीडिया रिपोट्र््स के अनुसार नई शुरू की गई इंटरनेट सेवा चीन का हांगकांग डाटा सेंटर एशिया का सबसे बड़ा डाटा सेंटर है। चीन नेपाल की अपनी इस परियोजना को नए सिल्क रोड के निकटवर्ती देशों के विस्तृत डिजिटल नेटवर्क के रूप में देख रहा है।

इसी तरह से श्रीलंका के मतारा में चीन द्वारा निर्मित मतारा-कटारागामा रेलवे विस्तार परियोजना के पहले चरण का ट्रैक बिछाने का काम प्रारंभ हो गया है। खबर के मुताबिक, परियोजना के पहले चरण में द्वीप देश के दक्षिण में मतारा से बेलिअट्टा तक रेलवे सेवा का निर्माण शामिल है। श्रीलंका के राज्य उद्यम विकास मंत्री लक्ष्मण यपा अबेवर्दना ने एक सम्मेलन के दौरान कहा कि द्वीप देश परियोजना के पहले चरण को आने वाले महीनों में पूरा करने की आशा कर रहा है, जिससे जनता और पर्यटन को फायदा मिलेगा। अबेवर्दना ने कहा कि राष्ट्रपति (मैत्रिपाला सिरीसेना) और श्रीलंका की सरकार की ओर से मैं इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के लिए चीन सरकार का धन्यवाद देना चाहूंगा। यह विस्तार एक ऐतिहासिक विकास है, जिससे सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र के साथ साथ देश के पर्यटन क्षेत्र को बहुत फायदा होगा। मंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने इस परियोजना को लागू करने के लिए प्रयास किए थे। चीन सरकार और चीन की कंपनियों की सहायता से यह परियोजना जल्द ही हकीकत में बदलने जा रही है। मतारा-कतारगामा रेलवे परियोजना 1948 में द्वीप देश के आजादी प्राप्त करने के बाद श्रीलंका में बनने वाली पहली नई रेलवे लाइन है।

 

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