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विडम्बना: अध्यात्मिक संत भय्यूजी महाराज, कुछ यूं कर बैठे जीवन का अंत आज

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भोपाल। महाराष्ट्र की राजनीति में संकटमोचक माने जाने वाले और आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने अज्ञात कारणों के चलते गोली मार ली। गंभीर हालत में उन्हें बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक महाराज ने दोपहर को सिल्वर स्प्रिंग स्थित अपने बंगले की दूसरी मंजिल पर खुद को गोली मार ली। सूत्रों की माने तो भय्यूजी महाराज पिछले कुछ दिनों से पारिवारिक कलह के चलते परेशान थे, जिसके चलते ही उन्होंने कदम उठाया।

गौरतलब है कि भय्यू महाराज का असली नाम उदयसिंह देशमुख था। इनका जन्म 29 अप्रैल 1968 में मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में हुआ था। भय्यूजी के चहेते उन्हें भगवान सामान पूजते थे। भय्यूजी की पहली पत्नी का नाम माधवी था, जिनका दो साल पहले स्वर्गवास हो चुका है। पिछले साल ही भय्यूजी ने शिवपुरी की डॉक्टर आयुषी से दूसरा विवाह किया था। शिवराज सरकार ने प्रदेश में जिन पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था, उसमें से भय्यूजी महाराज भी एक थे लेकिन उन्होंने सरकार ने इसे ठुकरा दिया था।

भय्यू महाराज की पहचान एक मॉर्डन संत के रूप में थी। वे एक समय मॉडलिंग से भी जुड़े रहे। लेकिन पिछले कुछ समय से वे अवसाद से जुझ रहे थे। उन्होंने हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाने की बात भी कही थी। मालवा के शुजालपुर प्रांत से निकलकर देश-विदेश में अपनी आध्यात्मिक छवि के लिए पहचाने जाने वाले भय्यू महाराज ने मॉडलिंग के दुनिया से अपना करियर शुरू किया था और उसके बाद उन्होने शोहरत भरी मॉडलिंग की जिंदगी को अलविदा कहकर आध्यात्म के सफर पर चलना तय किया।

उनके भक्तों की फेहरिस्त में लता मंगेशकर से लेकर महाराष्ट्र की और देश- दुनिया की नामी हस्तियां रही है। जिनमें पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पीएम नरेंद्र मोदी, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, मनसे के राज ठाकरे, आशा भोसले, अनुराधा पौडवाल, फिल्म एक्टर मिलिंद गुणाजी भी शामिल हैं।

भय्यू महाराज से मिलने अब तक आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान और गुजरात की सीएम आनंदी बेन पटेल सहित कई बड़ी हस्तियां उनके आश्रम में आ चुकी हैं।
सद्भावना उपवास के दौरान उनको नरेंद्र मोदी ने बुलाया था। गुजरात पीएम बनने के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे। तब उपवास खुलवाने के लिए उन्होंने देश भर के शीर्ष संत, महात्मा और धर्मगुरुओं को आमंत्रित किया था। उसमें भय्यू महाराज भी शामिल थे।

भय्यू महाराज चर्चा में तब आए जब अन्ना हजारे के अनशन को खत्म करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने अपना दूत बनाकर भेजा था। बाद में अन्ना ने उनके हाथ से जूस पीकर अनशन तोड़ा था। इसके अलावा पीएम बनने के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे। तब उपवास खुलवाने के लिए उन्होंने भय्यू महाराज आमंत्रित किया था।  हाल ही में मप्र सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया था, लेकिन उन्होंने लौटा दिया था।

भय्यू महाराज की मौत पर कई बड़े नेताओं ने शोक जताया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट कर उनको श्रद्धांजलि दी है। वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनकी मौत पर संवेदना प्रकट की है।

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