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भाजपा सांसद के इशारे पर हुआ भाई पर हमला, तभी ढिलाई बरत रहा है प्रशासनिक अमला: डॉ कफील

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लखनऊ। बहुचर्चित गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज काण्ड के आरोपी रहे डा. कफील खान ने अपने भाई पर हुए जानलेवा हमले को लेकर प्रदेश की योगी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया है। दरअसल डॉ कफील के भाई पर हुए जानलेवा हमले के आरोपी अभी तक फरार हैं।

गौरतलब है कि डॉ कफील ने लखनऊ में प्रेस वार्ता कर आज कहा कि बांसगांव से भारतीय जनता पार्टी के सांसद कमलेश पासवान ने भाई के ऊपर हमला कराया है। वह मुख्य साजिशकर्ता है, इसके साथ ही उन्होंने सरकार को भी कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि 6 दिन से ज्यादा हो गए हैं लेकिन पुलिस ने किसी को नहीं पकड़ा। कफील ने आरोप लगाया है कि जो पुलिस वाले जांच कर रहे है वही हमलावरों के साथ मिले हुए हैं।

उनका आरोप है गोरखनाथ मंदिर से सिर्फ पांच सौ मीटर की दूरी पर हुए इस गोलीकांड के छह दिन बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई न होना इस सरकार की विफलता है। डॉ कफील ने आज लखनऊ में प्रेस वार्ता की। डॉ. कफील खान ने कहा कि काशिफ जमील के अनुसार जानलेवा हमला उन पर बांसगांव से भारतीय जनता पार्टी के सांसद कमलेश पासवान, सतीश नंगलिया व बल्देव प्लाजा गोरखपुर के मालिक ने इमाम हुसैन और निकहत आरा के साथ षड्यंत्र कर करवाया है।

उन्होंने कहा कि पासवान मेरे भाई पर जानलेवा हमले की साजिश में शामिल है। उनकी शह पर पुलिस ने इलाज में देरी कराई। उन्होंने इस मामले की न्यायिक या सीबीआई जांच की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में जानबूझकर विलंब करने वाले दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

डॉ. कफील ने कहा कि सरकार का भाई पर हमला करने वालों को 48 घंटे में पकडऩे का दावा था, लेकिन सात दिन बाद भी अभी एक स्तर पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। भाई पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस ने वादा किया था कि उनके भाई को कासिफ पर जानलेवा हमला करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा, लेकिन हमलावार तो मजे से घूम रहे हैं। बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर डॉ. कफील खान के छोटे भाई कासिफ जमील पर 10 जून को गोरखनाथ मंदिर से कुछ दूरी पर जानलेवा हमला हुआ था।

इतना ही नही उन्होंने उस रात हुई घटना के बारे में बताते हुए कहा कि 2 हमलावरों ने उनके भाई की पीठ पर एक गोली मारी, दोनों हमलावर स्कूटी सवार थे। जो स्कूटी चला रहा था उसने हेलमेट पहना था और दूसरे ने गमछा लपेटा था। मगर मेरा भाई उसे आंखों से पहचान सकता है। दूसरी गोली सामने की तरफ से मारी गई जो उसके हाथ को चीरते हुए निकली। तीसरी गोली बाएं बाजू से गर्दन पर आकर अटक गई, लेकिन मेरा भाई काशिफ भागता रहा। भागते हुए वो एक निजी हॉस्पिटल में पहुंचे और डॉक्टर ने ईलाज करने से मना कर दिया। फिर आस पास के लोगों ने मदद कर ऑटो में डाल दिया और परिवार को सूचित किया ।

उन्होंने कहा कि पुलिस का कहना है कि घटना के बारे में पहले मीडिया को बताया गया फिर पुलिस को, लेकिन ये सरासर गलत है जब कि एसएसपी शलभ को मेरे भाई ने खुद कॉल करके बताया था जिसकी कॉल डिटेल हमारे पास है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मेरे भाई का फोन जब्त कर लिया है।

साथ ही उन्होंने बताया कि पहले डॉ. वजाहत ने मेरे भाई का इलाज किया और उसके बहते खून को रोका। कफिल ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने बिना बताए हमारा पीछा किया। यहां अस्पताल में पुलिस वालों ने भाई का इलाज नहीं होने दिया फिर हमें जबरन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। 11 बजे गोली लगी और 2.30 घंटे से ज्यादा मुझे पुलिस ने परेशान किया। मेरे भाई की हालत ख़राब हो रही थी, जो ऑपरेशन 11 बजे होना था वो सुबह 3 बजे हुआ।

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