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PM मोदी ने समूचे विपक्ष पर किया जर्बदस्त वार, UP में की भाजपा के लिए सियासी जमीन तैयार

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लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक तरह से बड़े ही सधे अंदाज में गुरुवार को संतकबीर की निर्वाणस्थली से भाजपा के लिए बखूबी सियासी जमीन तैयार कर दी। जिसके तहत उन्होंने जहां  यूपी में महागठबंधन का नाम लिए बगैर सपा और बसपा के साथ कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि एक वो (विपक्ष) है जिसको महज अपने बंगलों की ही चिंता है और हमारी सरकार को गरीबों के लिए आवास की चिंता है। हम जहां कबीर साहिब के आदर्शों चलते हुए शांति और विकास की बात करते हैं वहीं  विपक्ष कलह और असंतोष का माहौल बनाने में लगा है।

गौरतलब है कि कबीर दास जी की जयंती पर कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को संत कबीर दास की परिनिर्वाण स्‍थली मगहर पहुंचे। यहां उन्होंने आयोजित एक कार्यक्रम को भी संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि कबीर धूल से उठे और माथे का चंदन बन गए, उन्होंने समाज में जाति का भेद मिटाने के साथ उस समाज को जागृत किया। कबीर का पूरा जीवन सत्‍य की खोज में बीता है। वह फक्‍कड़ स्‍वभाव के थे, लेकिन दिल के साफ थे। बाहर से कठोर और भीतर से कोमल थे। वह अपने जन्‍म से नहीं कर्म से महान बन गए।

संत कबीर के बाद संत रैदास आए। अंबेडकर आए। सभी ने अपने-अपने तरीके से समाज को रास्‍ता दिखाया। बाबा साहब अंबेडकर ने हमें जीने का अधिकार दिया। आज समाज में राजनीतिक लाभ लेने के लिए समाज में असंतोष पैदा कर रहे हैं। कुछ दलों को शांति और विकास नहीं, कलह और अशांति चाहिए, उनको लगता है जितना असंतोष और अशांति का वातावरण बनाएंगे उतना राजनीतिक लाभ होगा।

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि ऐसे लोग जमीन से कट चुके हैं। उन्‍होंने कहा कि देश के राजनेताओं को गरीबों की चिंता नहीं रही। उन्हें बंगले का मोह है। करोड़ों के बंगले बनाने वालों ने गरीबों के लिए कुछ नहीं कहा। उन्‍होंने कभी गरीबों के लिए घर का निर्माण नहीं कराया। जब मोदी सरकार आई तो गरीबों के लिए छत का इंतजाम शुरू करा दिया। अभी दो दिन पहले ही देश में आपाल काल के 43 साल हुए। सत्‍ता की लालच ऐसा हो गया है कि आपात काल लाने वाले और उसका विरोध करने वाले कंधा से कंधा मिला लिए हैं। पीएम ने कबीर के राम को आदर्श बताया तो कलाम साहब के सपने को पूरा करने का संकल्प लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि तीन तलाक के मामले में भी इन राजनीतिक दलों को देखा है। आज मुस्लिम महिलाएं भी तीन तलाक के खिलाफ हैं। लेकिन राजनीतिक दलों के लोग मुस्लिम महिलाओं की भलाई की कोई चिंता नहीं है। कबीरदास ने कहा था कि शासक वही है जो जनता की पीड़ा को समझता हो और उसका निदान करता हो। पर अफसोस कुछ परिवार आज कबीरदास की बात को पूरी तरह नकारने में लगे हैं। वह भूल गए हैं कि आज हमारे साथ कबीर दास हैं। कबीर दास मनुष्‍य-मनुष्‍य के बीच भेद पैदा करने वालों के खिलाफ थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कबीर के दर्शन को लोग नहीं समझ रहे हैं। हमारी सरकार गरीब, दलित, पीडि़त, वंचित लोगों के लिए काम कर रही है। लगभग पांच करोड़ लोगों का खाता खुलवाया। करीब एक करोड़ लोगों को सुरक्षा बीमा का कवच देकर और यूपी के गांवों में सवा करोड़ शौचालय बनवाया। हमने सुलभ स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं देने का वीणा उठाया है। कबीर श्रमयोगी थे। कबीर ने कहा था कि काल करे सो आज कर—उसी के तहत तेजी के साथ बन रही सड़कें एवं कार्य कबीर के विचारों का प्रतिबिंब है। भारत का पूर्वी भाग काे विकास से अलग कर दिया था। आज काम हो रहा है।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि कबीर को समझने के लिए कोई भाषा नहीं गढ़ी। बोलचाल की भाषा का इस्‍तेमाल किया। बोलचाल की भाषा में ही उन्‍होंने जीवन दर्शन को बताया। उनके कई दोहों का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि समय के साथ समाज में आने वाली आंतरिक बुराइयों को समाप्‍त करने के लिए ऋृषियों, मुनियों ने हमें मार्ग दिखाया। देश की चेतना को बचाने का कार्य संतों ने समय समय पर किया। उन्‍होंने बल्‍लभाचार्य, रामानुजाचार्य, रामानंद, तुलसी आदि कई संतों का नाम लेते हुए कहा कि उस दौर में भी तमाम विपत्तियों से गुजरते हुए समाज को नई दिशा दी। रामानंद ने तो समाज के सभी वर्गों को जोड़कर जाति-पाति और छुआछूत को समाप्‍त किया।

पीएम आगे बोले कि, प्रधानमंत्री ने कहा कि कबीर व्‍यक्ति से अभिव्‍यक्ति बन गए। उन्‍होंने समाज की चेतना को जागृत करने का काम किया। उन्‍होंने कहा था कि यदि हृदय में राम है तो क्‍या काशी क्‍या मगहर। कबीर दास कहते थे कि हम काशी में प्रकट भये हैं, रामानंद चेताए। कबीर भारत की आत्‍मा और रससार कहे जा सकते हैं। उन्‍होंने जाति-पाति के भेद तोड़ा। पीएम ने कहा कि सैकड़ों वर्षों की गुलामी के कालखंड में अगर देश की आत्मा बची रही, तो वो ऐसे संतों की वजह से ही हुआ।

इससे पहले अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए पीएम ने उपस्थित जनसमुदाय को भोजपुरी में प्रणाम किया और कहा कि इस पावन भूमि को प्रणाम करत बानी। यह हमार सौभाग्‍य है कि आज हम यहां आइल बानी। उन्‍होंने कहा कि आज मुझे भी तीर्थ स्‍थल पर आने का मौका मिला। मैने कबीर की मजार पर चादर चढ़ाई, फूल चढ़ाया। कबीर दास की गुफा भी देखी। ऐसा कहा जाता है कि यहां पर गुरु गोरखनाथ, संतकबीर दास और गुरु नानक ने एक साथ बैठकर आध्‍यत्मिक चर्चा की थी। उन्‍होंने कहा कि तीरथ गए तो एक फल…कहकर कहा कि यह भूमि पूण्‍य फल देने वाला है। करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से कबीर के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा।

इससे पहले पीएम ने यहां कबीर की समाधि और मजार पर चादर चढ़ाकर शीश नवाया। इसके बाद उन्होंने यहा 24.9375 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली संतकबीर शोध अकादमी का शिलान्यास किया। क्षेत्र के विकास के लिए कई अन्य परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी जाएगी। मजार पर चादर चढ़ाने के बाद प्रधानमंत्री उस गुफा में भी गए जहां कहा जाता है कि कबीर दास जी ध्यान किया करते थे।

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