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बच्चों के जन्म के लिहाज़ से इंडिया में सर्वाधिक ध्यान की जरूरत:यूनिसेफ

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ब्रुसेल्स. यूनिसेफ ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि नवजात बच्चों के जन्म के लिहाज से पाकिस्तान सबसे ज्यादा जोखिम भरा देश है, वहीं भारत को उन दस देशों में रखा गया है जहां नवजात बच्चों को जीवित रखने के लिए सर्वाधिक ध्यान देने की जरूरत है. यूनिसेफ बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था है.

एवरी चाइल्ड अलाइव (द अर्जेंट नीड टू ऐंड न्यूबॉर्न डैथ्स) शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में जापान, आइसलैंड और सिंगापुर को जन्म के लिए सबसे सुरक्षित देश बताया गया है जहां जन्म लेने के पहले 28 दिन में प्रति हजार बच्चों पर मौत का केवल एक मामला सामने आता है.

यूनिसेफ के वैश्विक अभियान एवरी चाइल्ड अलाइव यानी हर बच्चा रहे जीवित के माध्यम से सरकारों, उद्यमों, स्वास्थ्य सुविधा प्रदाताओं, समुदायों और लोगों से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के वादे को पूरा करने और हर बच्चे को जीवित रखने की दिशा में काम करने की अपील की गई है. इसमें बांग्लादेश, इथियोपिया, गिनी-बिसाउ, भारत, इंडोनेशिया, मालावी, माली, नाइजीरिया, पाकिस्तान और तंजानिया को सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करने वाले देशों में रखा गया है.

इस सूची में दूसरे स्थान पर मध्य अफ्रीकी गणराज्य, तीसरे पर अफगानिस्तान और चौथे पर सोमालिया है. रिपोर्ट के मुताबिक इन देशों में संघर्ष, प्राकृतिक आपदाएं, अस्थिरता और कुशासन जैसी समस्याओं का प्रभाव स्वास्थ्य प्रणाली पर अकसर पडता है और नीति निर्माता प्रभावी नीतियां नहीं बना सके हैं.

इस सूची में उक्त तीन देशों के बाद फिनलैंड, एस्टोनिया, स्लोवेनिया, साइप्रस, बेलारूस, कोरिया गणराज्य, नार्वे और लक्जमबर्ग के नाम हैं. यहां प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवरों की संख्या भी अपेक्षाकृत अधिक है. यूनिसेफ की रिेपोर्ट में कहा गया है कि जापान, आइसलैंड और सिंगापुर में जन्मे किसी बच्चे की तुलना में पाकिस्तान में जन्मे बच्चे की पहले महीने में मौत हो जाने की आशंका करीब 50 गुना अधिक होती है.

निम्न मध्य आय वाले देशों में नवजात मृत्युदर के लिहाज से पाकिस्तान पहले नंबर पर है. भारत इसमें 12वें नंबर पर आता है. लेकिन केन्या, बांग्लादेश, भूटान, मोरक्को और कांगो जैसे देश इस मामले में भारत और पाकिस्तान से अच्छी स्थिति में हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में रोजाना करीब 7000 नवजात बच्चे काल के गाल में समा जाते हैं. इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक मामलों में प्रशिक्षित डाक्टरों, नर्सों आदि के माध्यम से किफायती, गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करके, प्रसव से पहले मां और प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को पोषण, साफ जल जैसे बुनियादी समाधानों से बच्चों की जान बचाई जा सकती है.

रिपोर्ट एक और महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान दिलाती है कि दुनियाभर में करीब 26 लाख बच्चों की जन्म लेने के एक महीने के अंदर ही मौत हो जाती है. इसके अलावा करीब 26 लाख बच्चे प्रतिवर्ष मृत ही जन्म लेते हैं.

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