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इलाहाबाद हाइकोर्ट का फरमान: सड़क,गली में बने मंदिर-मस्जिद तत्काल हटाएं

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लखनऊ:  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए सार्वजनिक संपत्ति पर तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने छह महीने के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चत करने का निर्देश दिया है।

आदेश के मुताबिक 1 जनवरी 2011 के बाद सार्वजनिक संपत्ति पर हुए किसी भी तरह के निर्माण को अतिक्रमण माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों जैसे सड़क, गली पर निमार्णाधीन मंदिर, मस्जिद आदि धार्मिक स्थलों को भी तत्काल हटाए जाएं। हालांकि कृषि योग्य भूमि को हाईकोर्ट ने अपने आदेश के दायरे से बाहर रखा है।

न्यायालय ने कहा है कि कृषि भूमि को वक्फ संपत्ति नहीं बनाया जा सकता,क्योंकि कृषि भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार को होता है। किसान उस जमीन का मात्र किरायेदार होता है,इसलिए जब तक धारा 143 के तहत अकृषित भूमि की घोषणा नहीं हो जाती उस पर वक्फ या धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार ने शुक्रवार को यह आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने राजमार्गों, सड़कों, गलियों और रास्तों के यातायात में अवरोध उत्पन्न कर रहे एक जनवरी 2011 के बाद अतिक्रमण कर बने मंदिर-मस्जिद सहित कोई भी धार्मिक स्थल तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ कहा है कि सड़क पर अतिक्रमण करने का किसी को भी मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं है।

न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को सड़क की जमीन पर किसी प्रकार का धार्मिक निर्माण न होने देने का सामान्य निर्देश जारी करे। साथ ही कहा है कि जनवरी 2011 के पहले के अतिक्रमण कर बने धार्मिक निर्माणों को छह माह के भीतर दूसरे स्थान में शिफ्ट किया जाय।  उच्च न्यायालय ने कहा है कि दस जून 2016 के बाद अतिक्रमण कर हुए धार्मिक निर्माणों की जवाबदेही जिलाधिकारी (डीएम) उपजिलाधिकारी (एसडीएम) वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) की होगी।

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