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क्या है महत्त्व घी या तेल का दीया जलाने का?

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डेस्क। जब भी आप एक अनुकूल माहौल बनाना चाहते हैं तो सबसे पहली चीज आप घर में तेल या घी का दीया जलाएं। यह परंपरा भारतीय परिवार का एक अहम हिस्सा रहा है। अधिक लाभ के लिए दीये का ईंधन विशेष तरह का होना चाहिए। मोमबत्तियों का, खासकर अगर वे रासायनिक मोम से बनी हों तो वैसा असर नहीं होता, जैसा दीये का होता है।

दरअसल बुनियादी रूप से आप एक ऐसे पदार्थ से आग जलाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अपने आसपास एक खास तरह का आभामंडल तैयार करता है, जिससे आकाश तत्त्व को पाना आसान हो जाता है। तेल के एक दीये के जरिए आप अपने घर में एक आकाशिक क्षेत्र तैयार करते हैं, जिससे आपको और आपके घर में दूसरे लोगों को इसका लाभ मिल सके। भारतीय संस्कृति में लोगों के जीवन में जितनी भी महत्त्वपूर्ण चीजें हैं, वे सब अग्नि के इर्द-गिर्द होती हैं। बिना अग्नि के न तो पूजा होती है, न शादी और न ही कोई अन्य महत्त्वपूर्ण आयोजन। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, रोगियों और सामान्य स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी है कि घर में तेल का जलता हुआ दीया रखें।

यह अग्नि सिर्फ आपकी जठराग्नि को ही नहीं बढ़ाती, जो आपके स्वास्थ्य को बेहतर और शरीर को मजबूत बनाती है, बल्कि चित्ताग्नि को बेहतर बनाने और आकाश तत्त्व को सुगम बनाने में भी मददगार होती है। यह भी महत्त्वपूर्ण है कि आपके भीतर प्रज्ञा की आग जलती रहे। अगर आपके भीतर सिर्फ भौतिक या शारीरिक आग ही जलेगी, प्रज्ञा की आंच नहीं होगी तो जीवन आपका दुखमय और भद्दा हो सकता है। जब लोगों में बहुत ज्यादा जठराग्नि होती है, और चित्ताग्नि पर्याप्त मात्रा में नहीं होती तो लोग अत्यंत मूर्खतापूर्ण हरकतें करते हैं। भारतीय संस्कृति में अग्नि का इस्तेमाल कई अलग-अलग रूपों में होता रहा है, जिनमें यज्ञ की अग्नि जैसे होम व हवन भी शामिल हैं। अग्नि आकाश को और सुगम बनाती है। हम जितने भी तत्त्वों से बने हैं, उनमें आकाश ही एक ऐसा तत्त्व है, जो सबसे ज्यादा पारदर्शी व तरल है। हमारे और आपके शरीर में जो भूमि तत्त्व है, वह बुनियादी रूप से समान है, लेकिन अगर हम आपके और अपने शरीर में मौजूद चीजों के संदर्भ में बात करें तो यह साफ तौर से अलग हैं।

 

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