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राजकीय सम्मान के साथ हुआ UP के दोनों शहीदों का अंतिम संस्कार, सदमे में है परिवार

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लखनऊ। नापाक पाक की संघर्ष विराम के दौरान की गई गोली बारी में शहीद हुए उत्तर प्रदेश के दो जवानों का शव उनके पैतृक गांव पहुंचते ही जहां पूरे गांव और शहर में शोक की लहर दौड़ गई वहीं परिवारीजनों का हाल-बेहाल हो गया। बीती रात जब फतेहपुर निवासी बीएसएफ के शहीद जवान विजय कुमार पाण्डेय का शव देर रात उनके पैतृक गांव पहुंचा। शहीद की शहादत पर सठिगवां समेत पूरा जिला रो पड़ा। इसी प्रकार देवरिया में शहीद सत्यनारायण यादव का शव सोमवार सुबह पहुंचने पर पूरे गांव में सन्नाटा चीखों में तब्दील हो गया। घटना की सूचना से  शहीद की चाची ने भी दम तोड़ा और पत्नी भी ताबूत पर गिरकर बेसुध हो गई।

गौरतलब है कि एसएफ जवान विजय कुमार पाण्डेय का पार्थिव शरीर रविवार शाम सेना के विशेष वाहन से लखनऊ लाया गया। जहां से देर रात चांदपुर थाना क्षेत्र के उनके  पैतृक गांव सठिगंवा पहुंचा। विजय का शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। सुबह शहीद के अंतिम दर्शन करने को हजारों की भीड़ जुट गई। जहां से भारत माता की जय, शहीद विजय अमर रहे व पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे के बीच विशाल जन समूह के साथ जवान की अंतिम यात्रा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय के पास पहुंची।

राज्य सरकार के प्रतिनिधि कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी, केन्द्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, कृषि राज्य मंत्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह, कारागार राज्य मंत्री जयकुमार जैकी, विधायक कृष्णा पासवान, पूर्व सांसद राकेश सचान, पूर्व मंत्री मदन गोपाल वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद द्विवेदी, डीएम कुमार प्रशांत, एसपी राहुल राज ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। शहीद विजय का पूर्ण राजकीय व सैनिक सम्मान के साथ अंत्येष्टि हुई। उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि शहीद के भाई अजय पाण्डेय ने दी।

इसी प्रकार देवरिया के सत्यनारायण यादव हमारे देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हुए अखनूर सेक्टर में पाकिस्तान की गोली से शहीद हो गए थे। सूचना उनके परिजनों को रविवार की रात को ही दे दी थी। इसकी खबर मिलते ही सत्यनारायण की चाची रामरती देवी की हालत बिगड़ गई, जिसनेे सोमवार सुबह दम तोड़ दिया।

शहीद का शव सोमवार सुबह पहुंचने पर शहीद को पुलिस लाइन में सलामी दी गई। सेना के वाहन में से ताबूत उतारते ही शहीद की पत्नी सुशीला ताबूत पर गिरकर ही अचेत हो गई। महिलाओं ने किसी तरह उसे संभाला। जैसे ही लोगों की नजर शव पर गई चारों तरफ से चीख-पुकार शुरू हो गई। शहीद के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

ज्ञात हो कि गांववालों के साथ परिजन शहीद की अंत्येष्टि करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि प्रदेश का लाल भारत माता की रक्षा के लिए शहीद हुआ है तो उसकी अंत्येष्टि में मुख्यमंत्री योगी यहां पर क्यों नहीं आए। इस घटना के बाद मौके पहुचे पूर्व केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने समझा कर शहीद के बड़े बेटे शंभू की मुख्यमंत्री योगी से बात कराई। बातचीत हो जाने के बाद परिजनों ने अंत्येष्टि करवाई।  उल्लेख है कि शहीद सत्यनारायण पांच बहनों के इकलौते भाई थे। उनके पिता भी बीमार रहते है।

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