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सरकार बनाने की ख़्वाहिश, दो पार्टियों की जोर-आजमाईश

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नई दिल्ली। कर्नाटक के बाद अब कांग्रेस जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने को लेकर जोर आजमाईश में जुट गई है जिसके चलते पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती के सोनिया और राहुल से मिलने की चर्चायें जोरों पर हैं। दरअसल महबूबा इन दिनों दिल्ली में हैं और वे सोनिया-राहुल से मुलाकात कर सकती है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद अब एक बार फिर से राज्य में सरकार बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। ऐसे में अटकलों का बाजार भी गर्म है इन अटकलों के बीच जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती की कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मिलने की खबर है।

इसी कवायद के तहत जहां आज पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के घर कांग्रेस के पॉलिसी एंड प्लानिंग ग्रुप (पीपीजी) की बैठक हुई। इस बैठक में  डॉ कर्ण सिंह, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, राज्यसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता गुलाम नबी आजाद और अंबिका सोनी शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में जम्मू-कश्मीर पर भी चर्चा हुई। मंगलवार को भी कांग्रेस ने श्रीनगर में एक बैठक बुलाई है जिसमें जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के नेता, सभी विधायक और पूर्व मंत्रियों को बुलाया गया है

ज्ञात हों कि हाल फिलहाल  89 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 44  विधायकों की आवश्यकता है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं, जबकि पीडीपी के पास 28 विधायक। अगर कांग्रेस और पीडीपी साथ आ भी जाते हैं तो दोनों का कुल जोड़ 40 बनता है और ऐसे में उन्हें 4 और विधायकों की आवश्यकता होगी। तीन निर्दलीय विधायकों के अलावा एक विधायक सीपीआई-एम और एक विधायक जेकेपीडीएफ का है।

जानकारों के अनुसार इन सबसे परे जहां महबूबा के सामने इस बात की समस्या खड़ी है कि कहीं भाजपा उसके विधायक तोड़ न दे। वहीं कांग्रेस अगर महबूबा के साथ जाती है तो उसे पीडीपी की विरोधी नेशनल कांफ्रेस (एनसी) से अपना रिश्ता खत्म करना होगा या फिर उसे विश्वास में लेना होगा और यह दोनों ही काम कांग्रेस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं।

हालांकि अपनी किरकिरी से बचने के लिए फिलहाल कांग्रेस इस बात पर साफ इंकार कर रही है क्योंकि जब मामला तक पुख़्ता नही हो जाता तब तक वो इसे जाहिर नही करना चाहती तभी इस बाबत कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि भाजपा के समर्थन वापस लेने से सत्ता से बाहर हुई पीडीपी के साथ किसी तरह के गठबंधन का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। वहीं उन्होंने पीडीपी के किसी नेता से मिलने से भी इनकार किया।

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