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हरियाणा में खट्टर सरकार का फैसला कट्टर, तमाम प्रतिबंध होगें लागू रेप के आरोपी पर

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नई दिल्ली। देश भर में बढ़ते रेप के मामलों को लेकर अब तकरीबन सभी राज्य सरकारें भी बेहद गंभीर नजर आ रही हैं जिसके चलते वो रोज ही कोई न कोई ऐसा नियम कानून ला रही हैं जिससे ऐसे मामलों में कमी आ सके और ऐसा करने वालों पर एक खौफ बनाया जा सके। इसी क्रम में अब हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने बेहद ही सख्त कदम उठाने का कट्टर फैसला किया है।

गौरतलब है कि राज्‍य में महिलाओं की सुरक्षा और बलात्‍कार के मामलों को देखते हुए हरियाणा सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। महिलाओं से होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं पर भी सख्‍ती से कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने फैसला किया है कि जो भी व्‍यक्‍ति छेड़छाड़ और बलात्‍कार जैसे मामलों में दोषी होगा, उसका ड्राइविंग लाइसेंस और हथियार का लाइसेंस जब्त कर लिया जाएगा।

इसके साथ ही किसी भी तरह की मिल रही पेंशन और राज्य सरकार की सुविधाएं भी बंद कर दी जाएंगी। वहीं, आरोप लगने के बाद कोर्ट का फैसला आने तक राज्य सरकार से उसे राशन के अलावा मिल रही सारी सुविधाएं जैसे कि वृद्धावस्था या दिव्यांगता पेंशन, वजीफा, ड्राइविंग और असलहों का लाइसेंस आदि निलंबित कर दिया जाएगा।

इतना ही नही यदि वह निर्दोष पाया जाता है, तो सभी सुविधाएं फिर से बहाल कर दी जाएंगी। यही नहीं, यदि महिला किसी महिला के खिलाफ भी अपराध करेगी, तो उसे भी नहीं छोड़ा जाएगा। इसके अलावा इन नई घोषणाओं में कहा गया कि महिला गवाह को अगली तारीख देकर परेशान नहीं किया जाएगा। कम से कम तारीखों में उसकी गवाही कराई जाएगी। खट्टर सरकार बलात्‍कार के मामलों में पीड़िता को वकील की नियुक्ति के लिए 22,000 रुपए की वित्तीय सहायता देगी।

इसके साथ ही छेड़छाड़ के मामलों में जांच अधिकारी को अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। अगर 15 दिनों के अंदर जांच अधिकारी मामले में रिपोर्ट नहीं सौंपता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बलात्कार के मामलों को तेजी से ट्रैक किया जाएगा और जांच पूरी होने के 30 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।

इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा के लिए दुर्गा शक्ति नाम की पीसीआर को तैनात किया जाएगा। हरियाणा में 6 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित की जाएंगी, जो उच्च न्यायालय को अपनी रिपोर्ट देगीं। फास्ट ट्रैक कोर्ट हरियाणा उच्च न्यायालय की देखरेख में काम करेगी। इसी के साथ हर मामलों की समय सीमा पर रखी जाएगी, जिससे पीड़िता को समय पर इंसाफ दिया जा सके।

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