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गर्दन के आसपास गांठ है तो हो सकता है थायरॉइड कैंसर का लक्षण

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थायरॉइड की बीमारी पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है. इसको लोग एक सामान्य समस्या मानते हैं और इलाज को लेकर लापरवाही भी करते हैं. लेकिन ये डिजीज कैंसर में भी बदल सकती है. अगर गर्दन के आसपास गांठ है तो ये थायरॉइड कैंसर का एक लक्षण हो सकता है. इस कैंसर होने का एक बड़ा कारण जेनेटिक भी होता है. ये बीमारी छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों को हो सकती है. महिलाओं में पुरुषों की तुलना में इसके ज्यादा केस रिपोर्ट किए जाते हैं.

डॉक्टर बताते हैं कि थायरॉइड ग्लैंड गले में तितली के आकार का होता है ,जिसका वजन लगभग 20 ग्राम होता है. थायरॉइड ग्लैंड महत्वपूर्ण हार्मोन बनाता है जो हृदय गति और शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है. कैंसर होने की स्थिति में थायरॉइड ग्लैंड में सूजन आने लगती है और ये उभरा हुआ नजर आने लगता

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. कवलजीत सिंह के मुताबिक, थायरॉइड कैंसर के चार मुख्य प्रकार हैं. इनमें पैपिलरी थायरॉइड कैंसर, फॉलिक्युलर थायरॉइड कैंसर, मेडुलरी थायरॉइड कैंसर और एनाप्लास्टिक थायरॉइड कैंसर शामिल है. पैपिलरी थायरॉइड कैंसर सबसे आम प्रकार का थायरॉइड कैंसर है, जो सभी थायरॉइड कैंसर का लगभग 85 प्रतिशत है. इस प्रकार के कैंसर के लिए इलाज की दर अधिक है.

दुनिया भर में थायरॉइड कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं. नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (एनसीआरपी) इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं और पुरुषों में थायरॉइड कैंसर की घटनाओं में क्रमशः 62% और 48% की वृद्धि हुई है. घटनाओं में वृद्धि लोगों में बढ़ती जागरूकता और लक्षणों की समय पर पहचान की वजह से होती है. जागरूक होने की वजह से लोग समय पर जांच कराते हैं जिससे बीमारी का पता चलता है.

ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
डॉ. बताते हैं किअधिकांश थायरॉइड कैंसर गर्दन में एक छोटी गांठ के रूप में मौजूद होते हैं जो आमतौर पर कठोर और दर्द रहित होती है.

कुछ रोगियों को आवाज में खराश और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है. साधारण गर्दन की जांच से थायरॉइड कैंसर का पता लगा सकती है. हालांकि, 90% थायरॉइड नोड्यूल सौम्य होते हैं और कैंसर नहीं होते हैं.

ऐसे करें कंट्रोल
अगर किसी भी व्यक्ति को ये सभी लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर थायरॉइड की जांच करानी चाहिए. इसकी जांच के लिए थायरॉइड फंक्शन टेस्ट किए जाते हैं. इनमें टी3, टी4 और टीएसएच शामिल हैं. इसके अलावा गर्दन का अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट भी जरूरी है.

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