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रूसी जंगी जहाजों का सीरिया जाना, यानि तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका बढ़ाना

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दश्मिक। रूस के जंगी जहाजों का सीरिया की ओर अग्रसर होना यानि मौजूदा हालातों में दुनिया पर खतरे के बादल मंडराने और तीसरे विश्व युद्ध की ओर ले जाने जैसा है। हाल फिलहाल जैसा कि सीरिया के रास्ते में 2 रूसी जंगी जहाज मिलिट्री गाड़ियों के साथ देखे गए हैं । इनमें टैंक, मिलिट्री ट्रक और हथियारों से लैस नावें थीं।  उनसे काफी हद तक साफ जाहिर हो रहा है कि हालात काफी गंभीर और नाजुक हैं।

गौरतलब है कि यूएनएससी जैसी संस्थाएं शांति स्थापाति करने, युद्ध रोकने और जान-माल की क्षति रोकने में नाकाम साबित हुई हैं। तबाह जिन्दगियों और उजाड़ आशियानों का केन्द्र सीरिया आज दुनिया की जंग का अखाड़ा बन चुका है। दुनिया की तमाम ताकतें सीरिया को बमबारी का केंद्र बनाए हुए हैं।   सीरिया संकट को लेकर कई देशों की गुटबंदी हिंसक रूप ले रही है व इसको तीसरे विश्वयुद्ध की आहट माना जा रहा।

हालांकि अमरीका और उसके सहयोगी देशों ने जहां सीरिया पर आरोप लगाया है कि वह रासायनिक हथियार का इस्तेमाल कर रहा है, वहीं रूस और सीरिया  सरकार ने अमरीकी कार्रवाई की निंदा की है।  कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस के जंगी जहाज सीरिया की ओर बढ़ रहे हैं । मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को सीरिया के रास्ते में 2 रूसी जंगी जहाज मिलिट्री गाड़ियों के साथ स्पॉट किए गए । इनमें टैंक, मिलिट्री ट्रक और हथियारों से लैस नावें थीं। एक जहाज को तुर्की के पास बॉस्फोरस में देखा गया। जहाज की फोटोज को बॉस्फोरस स्थित एक समुद्री पर्यवेक्षक ने ट्विटर पर पोस्ट किया है।

ज्ञात हो कि 2011 में जब अरब के कई देशों में जैस्मिन क्रांति शुरू हुई थी तभी सीरिया में भी इसकी शुरुआत हुई थी। लेकिन 7 साल बाद भी सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सेना और विद्रोहियों के बीच युद्ध जारी है। 5 लाख लोग अब तक मारे जा चुके हैं और इससे भी कई गुणा ज्यादा लोग शरण लेने के लिए पड़ोस के देशों की ओर पलायन कर चुके हैं। सीरिया के कई शहर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। सीरिया के रासायनिक सऊदी अरब और तुर्की अमरीका का समर्थन कर रहे हैं।  दूसरी ओर, ईरान और चीन ने अमरीका की कार्रवाई को दूसरे देश के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप बताया। ईरान की इस जंग में रूस  सीरियाई राष्ट्रपति असद के साथ खड़ा है। उधर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा भले ही इस बार की अमरीकी कार्रवाई में शामिल नहीं थे लेकिन इससे पहले के एक्शन में उन्होंने साथ दिया था। सऊदी अरब असद सरकार और ईरानी हस्तक्षेप के खिलाफ है और आरोप लगते हैं कि विद्रोहियों को काफी हथियार भी सऊदी अरब से ही मिलते हैं।

 

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