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तूतीकोरिन : मारे गए लोगों को लेकर वाम दलों ने किया विरोध प्रदर्शन

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चेन्नई। यहां तूतीकोरिन में वेदांता के स्टरलाइट प्लांट के विस्तार के खिलाफ तीन महीने से जारी प्रदर्शन के अचानक मंगलवार को हिंसक हो जाने के चलते 11 लोगों की मौत पर चारों तरफ हंगामा मचा हुआ है। प्रदर्शन में मारे गए लोगों के लिए बुधवार को वाम संगठनों ने संयुक्त विरोध प्रदर्शन किया।

इस बीच शहर में बुधवार दोपहर एक बार फिर से हिंसा भड़क गई और लोगों ने अस्पताल के बाहर खड़ी एक बस को आग के हवाले कर दिया। इस बीच हिंसा में घायल एक और शख्स की मौत की सूचना है जिसके बाद मरने वालों की संख्या 13 हो गई है।

इससे पहले केंद्र सरकार ने पूरे घटनाक्रम को को लेकर राज्य से रिपोर्ट मांगी है वहीं मद्रास हाईकोर्ट ने ने कॉपर यूनिट के विस्तार पर रोक लगा दी है। गृह मंत्रालय के अलावा मानव अधिकार आयोग ने भी नोटिस जारी कर पूरे घटनाक्रम पर रिपोर्ट मांगी है।

तूतिखुड़ी में भारी सुरक्षाबल तैनात किया गया है और धारा 144 लागू कर दी गई है। शहर में हिंसा और लोगों की मौत को लेकर राहुल गांधी ने ट्वीट किया है और इसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद करार दिया है।

जानकारी के अनुसार यहा स्टरलाइट प्लांट के विस्तार के खिलाफ तीन महीने से प्रदर्शन हो रहे थे लेकिन मंगलवार को यह प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया।

इस दौरान हुई फायरिंग में 11 लोगों की मौत हो गई है। इस हिंसा को लेकर विपक्षी पार्टियों ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की है, जबकि सरकार का कहना है कि इसे टालना लगभग नामुमकिन था।

मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने मृतकों को दस-दस लाख रुपये बतौर मुआवजा देने की घोषणा की है। इसके साथ ही घटना की न्यायिक जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

उनका कहना है कि प्रदर्शनकारी प्रशासन के आदेश की अवहेलना कर जिलाधिकारी कार्यालय की तरफ जा रहे थे। राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने घटना की निंदा करते हुए मृतकों के परिजनों से सहानुभूति जताई है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तमिलनाडु में वेदांता प्लांट के विरोध में हुई घटना को राज्य प्रायोजित आतंकवाद करार दिया। ट्विटर पर उन्होंने लिखा कि लोग विरोध जता रहे थे और सरकार ने उन पर गोलियां चलवा दीं। यह सरकार की क्रूर कार्रवाई है। उनकी सहानुभूति लोगों के साथ है।

द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने घटना को अमानवीय बताया। उनका कहना है कि लोगों की भीड़ पर गोली चलाना दर्शाता है कि सरकार को उनकी मौत से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने घटना की न्यायिक जांच की मांग के साथ मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने को कहा है।

स्टालिन बुधवार को कर्नाटक की नई सरकार के शपथग्रहण समारोह में जा रहे थे, लेकिन उन्होंने बेंगलुरु जाना स्थगित कर दिया है।

अन्य दलों पीएमके, डीएमडीके, एमडीएमके, कांग्रेस, एमएनएम ने भी पुलिस कार्रवाई की भर्त्सना की है। एमएनएम के संस्थापर कमल हासन ने प्लांट को हमेशा के लिए बंद कर की अपील सरकार से की। एमडीएमके नेता वाइको ने घटना की तुलना जलियावाला बाग से की।

वेदांता के स्टरलाइट कॉपर प्लांट के विस्तार के खिलाफ प्रदर्शन लगभग तीन माह से चल रहा था। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार मंगलवार को तकरीबन 20 हजार लोगों का हुजूम एक चर्च के पास एकत्र हुआ और फिर जिलाधिकारी कार्यालय की तरफ चल पड़ा। प्रशासन ने पहले से ही प्लांट के आसपास धारा 144 लगा रखी थी। लोगों से कहा गया कि वे वापस लौट जाएं।

वो नहीं माने और रास्ते में आने वाले सरकारी दफ्तरों व वाहनों को जमकर निशाना बनाया गया। बैंकों को भी नहीं बख्शा गया। पुलिस का कहना है कि भीड़ ने जब पत्थरबाजी बंद नहीं की तो एहतियात के तौर पर पहले लाठियां और फिर गोलियां चलाई गईं। पहले फायरिंग हवा में की गई। वो नहीं माने तो सीधी फायरिंग की गई, जिसमें नौ लोगों की जान गई।

सरकार का कहना है कि मार्च 2013 में गैस लीक का मामला सामने आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता ने प्लांट को बंद करने का आदेश दिया था। कंपनी एनजीटी के पास चली गई। वहां से सरकार का आदेश निरस्त हुआ तो सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। याचिका अभी विचाराधीन है।

तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने भी कंपनी की एक अपील को खारिज कर दिया है। इसमें प्लांट की कार्यवाही को लेकर नई अनुमति मांगी गई थी। कंपनी ने इसके खिलाफ अपीलेट अथॉरिटी के पास गुहार लगाई है। याचिका पर सुनवाई छह जून को होनी है।

 

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