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आप नेताओं ने चुनाव आयोग समेत भाजपा और कांग्रेस को लिया आड़े हाथों

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नई दिल्ली | निर्वाचन आयोग ने लाभ के पद को लेकर आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार देने के साथ ही राष्ट्रपति से उनकी सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की है। जिससे बाद सीएम अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी बड़ी परेशानी में फंस गयी है। वहीं इस मामले पर आप के नेताओं ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे भाजपा और कांग्रेस दोनों की साजिश करार दिया है।

जिसके तहत जहां डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने चुनाव आयोग पर सवाल खड़े दिए हैं। उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रपति से समय मांग रहे हैं, हमारे विधायक उनसे मिलेंगे और अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा बीजेपी और कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के द्वारा किए गए काम से परेशानी हुई और केजरीवाल सरकार के काम की गति को धीमी करने की साजिश की गयी।

हालांकि बीजेपी और कांग्रेस ‘आप’ पर इस मुद्दे को लेकर हमला कर रही है। वहीं उन्होंने इसे बीजेपी और केद्र सरकार की साजिश बताया। साथ ही उन्होंने परेशान किये जाने’ का आरोप लगाते हुए कहा कि हमारी पार्टी चुनावों से नहीं डरती है। सिसोदिया ने कहा, इस मुद्दे को लेकर हमें कभी नोटिस नहीं दिया गया और न ही हमें अपनी बात रखने का मौका दिया गया। हमारे विधायक जल्द ही इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति से मिलेंगे।

वहीं इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी नेता संजय सिंह ने आज कहा कि यह सब लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश है। सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने आप के विधायकों का पक्ष सुनने की एक बार भी जरूरत नहीं समझी और एकतरफा फैसला ले लिया। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने खुद ही संसदीय सचिवों की नियुक्ति को निरस्त कर दिया था तो फिर इस मामले पर आगे कार्रवाई की कोई गुंजाइश ही नहीं बनती।

उन्होंने इस अवसर पर आप विधायकों की नियुक्ति का पत्र भी संवाददाताओं को दिखाते हुए कहा कि इसमें पहले ही साफ कर दिया गया था कि किसी को भी इसके एवज में कोई सरकारी सुविधा या किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र में जब यह साफ कह दिया गया था तो फिर ये पद लाभ के पद कैसे हो सकते हैं।

आप नेता ने इस सिलसिले में शीला दीक्षित सरकार तथा हरियाणा, पश्चिम बंगाल और पंजाब की सरकारों का भी हवाला देते हुए कहा कि इन सबने भी अपने कई विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था हालांकि बाद में वहां के उच्च न्यायालयों ने ये नियुक्तियां रद्द कर दी थीं लेकिन सदस्यों की सदस्यता नहीं रद्द की गयी।

 

 

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